सेहत के लिए सबसे फायदेमंद माना जाने वाला फल सेब धीरे-धीरे अपना मूल स्वाद खो रहा है। ये जानकारी जापानी वैज्ञानिकों की रिसर्च में सामने आई है।
1970 से लेकर 2010 के बीच हुई सेब के दो बगीचों पर हुई रिसर्च के मुताबिक जापानी वैज्ञानिकों ने पाया कि क्लाइमेट चेंज का सीधा असर सेब के स्वाद पर पड़ रहा है।
इससे सेब का टेस्ट धीरे-धीरे बदल रहा है। पहले की तुलना में सेब पहले जैसे क्रंची न होकर मीठे हो रहे हैं। ये सब मौसम में हो रहे सीधे बदलाव जैसे उगने के दौरान तापमान का बढ़ना आदि से संबंधित हैं।
दुनियां में कुल 60 मिलियन सेब हर साल उत्पादित किए जाते हैं जो इसे दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल बनाते हैं।
पहले हुईं रिसर्च में पता चलाता था कि वर्षा की मात्रा और हवा के तापमान में परिवर्तन के कारण पेड़ पर फूल जल्दी आ रहे थे।
रिसर्च में कौन से पहलु आए सामने -
ये ताजा रिसर्च जापान के नगानो और ओमोरी में दुनिया के सबसे पसंद किए जाने वाली सेब की दो किस्मों फुजी और सुगारू सेब पर की गई।
रिसर्च के दौरान ये भी ध्यान रखा गया कि खेती के तरीकों में किसी प्रकार का बदलाव और तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाए।
रिसर्च में सामने आया कि 0.31 डिग्री सेल्सियस से 0.34 से डिग्री सेल्सियस तापमान हर दशक बढ़ता रहा। डाटा के विश्लेषण के दौरान पता चला कि सेबों में एसिडिटी फर्मनेस की मात्रा कमी आई और शुगर की मात्रा ज्यादा हो गई।
जहां सेब की मिठास रिसर्च में सकारात्मक पहलु के तौर पर सामने आई है वहीं सबे के कुरकुरे स्वाद में कमी नकारात्मक पहलु लगा। लोग आमतौर पर मीठा और कंर्ची सेब पसंद करते हैं मुलायम सेब की तुलना में।