हर व्यक्ति
की आंख में एक प्राकृतिक लेंस होता है। यह लेंस एक पारदर्शी संरचना होती
है, जो किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब आंख के पर्दे पर बनाने में मदद करती है।
जब लेंस की पारदर्शिता किसी कारण कम हो जाती है तो व्यक्ति को देखने में
परेशानी होने लगती है। इसी स्थिति को मोतियाबिंद कहा जाता है। नेत्र रोग
विशेषज्ञ डॉ. संजय तेवतिया से जानें इससे जुड़ी अहम बातें।
किन्हें हो सकता है मोतियाबिंद
आमतौर
पर यह रोग उम्रजनित होता है। ऐसा देखा गया है कि 70 साल के आस-पास की आयु
के लगभग 90 प्रतिशत लोगों को मोतियाबिंद की समस्या होती है।
अगर ऐसा है तो
- इसमें आंख के बीच में (प्यूपिलरी एरिया) सफेद छाया (व्हाइट रिफ्लेक्स) दिखाई देती है।
- तेज रोशनी में चौंध लगना।
- एक वस्तु का दो या तीन दिखाई देना।
- आंख के सामने काले धब्बे दिखाई पड़ना।
- किसी वस्तु का धुंधला या आड़ा, तिरछा दिखाई देना।
उपचार के लिए इंतजार न करें
मोतियाबिंद
का एक मात्र उपचार ऑप्रेशन ही है। जो लोग पढ़ने- लिखने का काम करते हैं,
उनमें कम मोतियाबिन्द में भी ऑप्रेशन करना होता है। मोतियाबिंद के पकने का
इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मोतियाबिंद के फटने, कालामोतिया होने
और आंख की रोशनी जाने का भी खतरा रहता है।
आजकल मोतियाबिंद का बिना टांके वाला ऑपरेशन जैसे स्माल इन्सीजन केटेरेक्ट सर्जरी और फेकोईम्लसिफिकेशन केटेरेक्ट सर्जरी की जाती है।
आधुनिक तकनीक से आसान बनाएं इलाज
हाल
ही में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की अत्याधुनिक तकनीक फेम्टोसेकेंड लेजर
ऐसेस्टिड केटेरेक्ट सर्जरी विकसित हुई है। जिससे ऑपरेशन के लिए किसी ब्लेड
की आवश्यकता नहीं होती है। इस तकनीक में ऑपरेशन लेजर से किया जाता है।
पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर की देखरेख में होती है। इसके बाद व्यक्ति दूसरे
दिन से अपने नियमित काम कर सकता है।