तेल में मौजूद वसा, शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। लेकिन ज्यादा वसा ही मोटापे, हाई बीपी, डायबिटीज, एलर्जी, अस्थमा, हार्ट अटैक और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का कारण भी बनती है।
ऐसे में दैनिक आहार में वसा की सही मात्रा और गुणवत्ता का शामिल होना जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-
कितना खाएं तेल
तेल खाते वक्त मात्रा और गुणवत्ता, दोनों का ख्याल रखें। रोजाना तीन चम्मच तेल खा सकते हैं। घी-तेल सबकुछ मिलाकर इससे ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए। वहीं एक्सपर्ट्स की राय में इससे कम मात्रा में तेल के सेवन से भी त्वचा में रूखापन, होंठ फटना और प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कैसे-कैसे तेल
आमतौर पर खाने के तेल दो तरह के होते हैं- सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड। सैचुरेटेड फैट्स में घी, मक्खन, क्रीम व नारियल तेल आदि आते हैं। इन फैट्स का आसानी से पाचन नहीं हो पाता है।
शारीरिक श्रम करने वाले लोग तो इसे आसानी से पचा लेते हैं, लेकिन शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों के लिए यह समस्या बन सकता है। सैचुरेटेड फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाते हैं।
अपवाद के तौर पर नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। इसलिए सैचुरेटेड तेल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। अनसैचुरेटेड फैट्स के तौर पर रिफाइंड और वनस्पति घी मुख्य हैं।
इसमें रिफाइंड तेल को अच्छी तरह से प्रोसेस किया जाता है। इससे तेल की लाइफ और टेस्ट तो बढ़ता है लेकिन तेल में ट्रांस फैट आ जाते हैं। ये ट्रांस फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।
क्या इस्तेमाल करें
लगातार एक ही तेल न खाएं। कोई भी तेल सेहत के लिए पूरी तरह फायदेमंद नहीं है। ऑलिव आइल में मूफा (मोनो अनसैचुरेटेड) और पूफा (पॉली अनसेचुरेटेड) कम होते हैं, लेकिन ओमेगा-3 अच्छी मात्रा में पाया
जाता है।
इसी तरह, सैचुरेटेड फैट ज्यादा होने की वजह से नारियल तेल को अच्छा नहीं माना जाता, जबकि यह कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। बाजार में मिले-जुले तेल भी मिलते हैं, जिन्हें ब्लैंड ऑइल कहा जाता है।
इस तरह के तेलों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिस तेल में ओमेगा-3 जितना ज्यादा होगा, वह दिल के लिए उतना ही अच्छा होगा। इसके अंतर्गत मूंगफली, सरसों, ऑलिव ऑइल मुख्य हैं।