बालों को सुंदर और हेल्दी बनाने के लिए बाजार में कई तरह के हेयर प्रोडक्ट्स मौजूद हैं। हेयर ऑयल, सीरम, शैंपू, कंडीशनर, हेयर टॉनिक वगैरह-वगैरह। बालों की सेहत के लिए इतने सारे हेयर प्रोडक्ट्स, फिर भी बाल बीमार।
कोई झड़ते बालों से परेशान है, तो किसी के बाल ही नहीं बढ़ते। वहीं कुछ लोग असमय सफेद होते बालों से परेशान हैं। बालों को लेकर हर किसी की अपनी-अपनी परेशानी है।
वैसे तो हमारे बाल पूरी उम्र बढ़ते रहते हैं और एक समय के बाद टूट भी जाते हैं। लेकिन एक बाल की औसतन उम्र 3-6 साल होती है, जो तीन चक्रों से होकर गुजरता है। पहला फेज है एनाजेन, जिसमें बाल बढ़ते हैं और इसकी अवधि 2-4 या 3-8 वर्ष है। इसके बाद 10 दिनों का ट्रांजेशनल फेज यानी कैटाजेन आता है।
इस फेज में बालों का बढ़ना रुक जाता है या कम हो जाता है। इसके बाद आता है टेलोजेन फेज, जो लगभग 100 दिनों का होता है। इस फेज में बाल गिरते हैं और इनके स्थान पर नए बाल आ जाते हैं। यानी हर समय हमारे 10-15% बाल रेस्टिंग फेज में होते हैं और 2-3 महीने में गिर जाते हैं। इसके साथ नया चक्र शुरू हो जाता है।
ऐसे में अगर रोजाना 50-100 बाल गिरते हों, तो घ्ाबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन इससे ज्यादा बाल गिरने लगे, तो इस स्थिति में आपको डॉक्टर की सलाह जरूरी लेनी चाहिए।
कम होते बाल, चिंता की बात
अस्वस्थ जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण कम उम्र के युवा भी आज बालों की ऐसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो पहले बड़ी उम्र में ही देखने को मिलती थी।
तनाव, थायरॉइड, पोषक तत्वों की कमी, हारमोनल बदलाव की वजह से भी बाल कमजोर होने लगते हैं। कई बार जेनेटिक कारण भी बालों की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। बालों को टूटने से बचाने के लिए आपको डाइट में प्रोटीन, आयरन, जिंक, सल्फर, विटामिन-सी के अलावा विटामिन-बी से युक्त खाघ पदार्थ भरपूर मात्रा में लेने चाहिए।
बालों को टाइट बांधने, ब्लो ड्रायर या आयरन का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बाल कमजोर हो जाते हैं। इसीलिए बालों पर बहुत ज्यादा एक्सपेरिमेंट करने से बचें। हेयर केयर प्रोडक्ट जैसे- शैंपू, कंडीशनर इत्यादि अच्छी क्वालिटी के ही प्रयोग करने चाहिए।
इससे बाल अच्छे होंगे और टूटने से बचेंगे। बालों को गिरने से रोकने के लिए पानी पीना भी बेहतर उपचार है। पानी आपके बालों में भी एक नई चमक पैदा करता है और उन्हें स्वस्थ और मजबूत रखता है।
गंजापन पुरुषों में ही क्यों
गंजेपन की समस्या पुरुषों में अधिक दिखाई देती है, क्योंकि पुरुषों में फीमेल हारमोन एस्ट्रोजन नहीं पाया जाता, जो बालों को झड़ने से बचाने में सुरक्षा कवच का काम करता है।
यही नहीं पुरुषों के हेयर फोलिकल के गायब होने में पुरुष हारमोन टेस्टोस्टेरॉन भी जिम्मेदार है। महिलाओं में भी यह हारमोन पाया जाता है, पर इसका स्तर काफी कम होता है, इसलिए उनमें गंजेपन की समस्या कम होती है।
यदि कुछ महिलाएं गंजेपन की समस्या से परेशान हैं, तो इसका कारण आंतरिक न होकर ज्यादातर बाहरी ही होता है, जैसे- प्रदूषण, वातावरण में बदलाव या बालों पर कई तरह के स्टाइल और रसायनों के उपयोग से भी बालों की बाहरी परत यानी क्यूटिकल क्ष्ातिग्रस्त होता है, जिससे बाल टूटने लगते हैं।
सफेद बाल क्यों?
हेयर फोलिकल में मौजूद मेलानिन पिग्मेंट से बालों को रंग मिलता है। इसकी कमी होने पर बाल सफेद होने लगते हैं। वैसे बालों की सफेदी बहुत हद तक आपकी अनुवांशिकता पर भी निर्भर करती है। कुछ मामलों में तनाव, चिंता, पोषक तत्वों की कमी जैसे, कारणों से भी बाल असमय सफेद होने लगते हैं।
कई बार बालों पर ज्यादा गर्म पानी के इस्तेमाल, बालों की साफ-सफाई में कमी और हेयर ड्रायर के उपयोग से भी बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। खाने में प्रोटीन या आयरन की कमी व विटामिन बी-12 की कमी से भी बाल सफेद हो जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक एंटी मलेरिया दवा के प्रयोग से भी बाल असमय सफेद होने लगते हैं।
बालों को असमय सफेद होने से बचाना चाहती हैं, तो डाइट का खास ख्याल रखें। विटामिन-बी से भरपूर आहार जैसे- साबुत अनाज, फलियां आदि खाने में शामिल करें।
बालों को भी दें पोषक खुराक
दरअसल, हमारे बाल केरोटीन नामक प्रोटीन से बने होते हैं यानी प्रोटीन हमारे बालों में होता है, इसलिए भोजन में प्रोटीन का बहुत महत्व होता है। बाल झड़ने का सबसे प्रमुख कारण भोजन में पोषक तत्वों की कमी है। अगर भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम होगी, तो बाल झड़ेंगे और उनकी गुणवत्ता भी खराब होगी।
बालों की संरचना
क्यूटिकल, कॉर्टेक्स और मेड्यूला, इन्हीं तीन परतों से बना है हमारा बाल। बाहरी परत को क्यूटिकल कहते हैं, जो पतला और रंगहीन होता है। यह मोटे परत कॉरटेक्स को प्रोटेक्ट करता है, जिसमें मेलानिन होता है। बालों में मौजूद मेलानिन आपके बालों के रंग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
बालों का नेचुरल कलर इसी मेलानिन पर निर्भर होता है। जो दो प्रकार का होता है- पहला यूमेलानिन जो बालों को ब्राउन या काला बनाता है। दूसरा है-फियोमेलानिन जो लाल रंग के लिए जिम्मेदार है। यानी बालों का रंग इन्हीं मेलानिन की क्वालिटी पर निर्भर है।