बदलते मौसम में एलर्जी होना आम बात है। खासतौर पर सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ते वसंत के इस मौसम में वायुमंडल में पेड़-पौधों के परागकणों की मात्रा बढ़ जाती है। इसकी वजह से कुछ लोगों को एलर्जिक राइनाटिस (नाक की एलर्जी) की समस्या हो सकती है।
मौसम में इस बदलाव से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में यह समस्या पांच से आठ प्रतिशत तक बढ़ जाती है। ई.एन.टी स्पेशलिस्ट डॉ. रेखा सिंह से बातचीत के आधार पर अगर आप कुछ सावधानियां बरतेंगे और समय रहते इसका उपचार करने में आसानी होगी।
अगर ऐसा हो रहा है तो...
-नाक में खुजली और छीकें आना
-नाक से पानी आना
-नाक की त्वचा का लाल होना और उसमें खरोंचें आना, जो बार-बार नाक साफ करने के कारण होता है।
यह है वजह
इस रोग का कारण कई तरह की एलर्जी है। इनमें सबसे आम है प्रदूषण, धूल-मिट्टी, घास व पेड़-पौधों के परागकण।
घर से बाहर निकलने पर धूल और वायुमंडल में फैला प्रदूषण लोगों की नाक में चला जाता है। यही एलर्जिक राइनाइटिस का कारण बनता है। इसके अलावा पालतू कुत्ते, बिल्लियां रखने वाले परिवारों में एलर्जी
का जोखिम ज्यादा होता है। कुत्ते-बिल्ली जैसे बालों वाले जानवरों के बाल गिरते रहते हैं, जो एलर्जी का कारण बनते हैं।
और यह हो सकता है नुकसान
-नाक की एलर्जी साइनस के ऑस्टिया(छेदों) को बंद कर सकती है, जो कि साइनसाइटिस का कारण बन सकती है।
-ये नाक में पालिप बना सकती है।
-ये ऑडिटरी ट्यूब को बंद कर सकती है, जिससे कान के मध्यभाग में पानी भर सकता है।
-इन मरीजों में अस्थमा का जोखिम चार गुना बढ़ जाता है।
बचाव और उपचार भी है आसान
-इन्फेक्शन से बचने का प्रयास करें।
-ठंडी हवा, धूल और नमी से बचें।
-घर से बाहर निकलने पर कोशिश करें कि धूल के कण नाक में कम से कम जाएं।
-अगर धूल वाले स्थान पर जाना पड़े तो मुंह पर मास्क या रूमाल रखकर जाएं।
-घर में पालतू जानवरों कुत्ते, बिल्लियों आदि के बहुत अधिक नजदीक न जाएं।
-घर या कार्यालय में जहां सीलन हो, वहां जाने से बचें।
-धूम्रपान न करें।
-कुछ खाने से अगर नाक में एलर्जी हो तो उससे बचना चाहिए।
-ज्यादा तकलीफ होने पर नेजल स्प्रे का प्रयोग कर सकते हैं।
-रोग के लक्षण दिखाई देते ही कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।