आंखों की रोशनी कम हो रही है! किसी को पहचानने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं? चश्मा लगाने पर भी पूरी तरह देखने में सुविधा नहीं हो रही है! ये सभी लक्षण एम्बलायोपिया से जुड़े हैं।
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यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसके होने की आशंका ज्यादा रहती है। इससे बचने के लिए समय रहते सतर्कता बरतना जरूरी है।
क्या है एम्बलायोपिया
आंख के पर्दे (रेटिना) पर मेक्यूला पाया जाता है। मेक्यूला पर लगातार प्रकाश पड़ने से मेक्यूला स्टीमुलेट रहता है। जब किसी कारणवश मेक्यूला पर प्रकाश नहीं पड़ता है, तो मेक्यूला सुस्त या धुंधला हो जाता है और व्यक्ति को देखने में परेशानी होने लगती है। इस स्थिति को एम्बलायोपिया या सुस्त आंख की बीमारी कहते हैं।
क्या हैं कारण
एम्बलायोपिया जन्म से छह वर्ष की उम्र तक आंखों की रोशनी के विकास में कुछ विकार आने के कारण होता है। जन्म के बाद पहले छह महीने में यह समस्या होने की आशंका ज्यादा रहती है और छह साल की उम्र के बाद यह आशंका काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा भैंगेपन या दृष्टिदोष होने के बावजूद चश्मा न पहनने या सही नंबर का चश्मा इस्तेमाल न करने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।