जानलेवा बीमारी इबोला का प्रकोप 2015 के आखिरी तक ख़त्म हो जाएगा।
यह कहना है इस बीमारी के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र के दल के मुखिया एंथोनी बैनबरी का।
उन्होंने कहा कि इबोला के मामलों की संख्या इस साल के अंत तक शून्य तक पहुंच जाएगी लेकिन उन्होंने माना कि इसका खात्मा इतनी "जल्दी नहीं" होने वाला था।
उन्होंने कहा,"हम एक महायुद्ध लडने में लगे हुए हैं।"
इबोला के वायरस ने अब तक करीब 8000 लोगों की जान ले ली है।
इनमें से ज्यादातर सियरा लियोन, लाइबेरिया और गिनी के हैं जहां ये बीमारी दिसंबर 2013 में पहली बार फैली।
इबोला के लक्षण
तेज़ बुखार, रक्तस्राव, और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का क्षतिग्रस्त होना।
इबोला से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
शरीर के तरल पदार्थ मसलन खून और लार के माध्यम से फैलता है।
मृत्यु दर 90 फ़ीसदी तक हो सकता है लेकिन फिलहाल इबोला के मामले में मृत्यु दर 70 फ़ीसदी है।
सघन निगरानी की अवधि 2 से 21 दिनों तक।
कोई प्रमाणित टीका या इलाज उपलब्ध नहीं।
जिन रोगियों को उल्टी और दस्त हो रहा हो उनके शरीर में पानी की कमी को दूर करने से ठीक होने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम अफ़्रीका में फलों के पेड़ पर रहने वाले चमगादड़ इस वायरस के प्राकृतिक पोषक हैं।