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अवसाद की ये दवा एक इंसान को बना देती है स्वार्थी

Sat, 04 Jul 2015 04:11 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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बीमारी के उपचार के लिए दवाई लेना एक सामान्य बात है लेकिन यह दवा इंसान के नैतिक व्यवहार में बदलाव लाकर न सिर्फ उसके स्वभाव को पूरी तरह बदल सकती है बल्कि उसे स्वार्थी भी बना सकती है। सुनने में यह बात आश्चर्यजनक लग सकती है, लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसकी तस्दीक की है।
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यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक मॉली क्रोकेट ने अपने शोध में बताया कि अवसाद के इलाज के दौरान मरीज को दी जाने वाली डोपामाइसिन दवा इंसान के व्यवहार को स्वार्थी बना देती है। अध्ययन के मुताबिक इस दवा का संबंध पार्किंसन के साथ साथ जुआ खेलने और यौन व्यवहार भी जुड़ा हुआ है।

क्रोकेट ने कहा कि वह यह नहीं कह रही हैं कि यह दवा स्वस्थ इंसान को अपराधी बनाती है बल्कि इस दवा में ऐसी क्षमता है जो व्यक्ति के फैसले लेने की शक्ति के साथ उसका जीवन प्रभावित कर सकती है।
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अध्ययन के लिए 175 लोगों पर किया प्रयोग

अध्ययन के दौरान 175 लोगों को दो समूहों में बांटकर अवसाद में प्रयोग की जाने वाली दवा ‘सेरोटोनिन’ और पार्किंसन में प्रयोग की जाने वालीदवा ‘लेवोडोपा’ दी गई।

एक समूह के कुछ लोगों को करंट के झटके देने के बदले पैसे देने को कहा गया। लोगों को करंट के झटके नहीं देने के लिए भी पैसे देने को कहा गया। इससे लोगों के स्वार्थी व्यवहार का पता चला।
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