बीमारी के उपचार के लिए दवाई लेना एक सामान्य बात है लेकिन यह दवा इंसान के नैतिक व्यवहार में बदलाव लाकर न सिर्फ उसके स्वभाव को पूरी तरह बदल सकती है बल्कि उसे स्वार्थी भी बना सकती है। सुनने में यह बात आश्चर्यजनक लग सकती है, लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसकी तस्दीक की है।
यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक मॉली क्रोकेट ने अपने शोध में बताया कि अवसाद के इलाज के दौरान मरीज को दी जाने वाली डोपामाइसिन दवा इंसान के व्यवहार को स्वार्थी बना देती है। अध्ययन के मुताबिक इस दवा का संबंध पार्किंसन के साथ साथ जुआ खेलने और यौन व्यवहार भी जुड़ा हुआ है।
क्रोकेट ने कहा कि वह यह नहीं कह रही हैं कि यह दवा स्वस्थ इंसान को अपराधी बनाती है बल्कि इस दवा में ऐसी क्षमता है जो व्यक्ति के फैसले लेने की शक्ति के साथ उसका जीवन प्रभावित कर सकती है।