ब्रिटेन के डॉक्टरों ने पहली बार एक ऐसे दिल का ऑपरेशन किया है, जिसकी गति बहुत कम थी लेकिन उसकी धड़कनें चल रही थीं।
ऐसी सर्जरी जहाँ मरीज़ सब देख रहा है पर होश में नहीं है
इस मरीज का दिल शरीर के हिस्सों को ख़ून की आपूर्ति करने के लिए संघर्ष कर रहा था। ऐसे में उस पर थोड़े से भी दबाव से उसकी मौत हो सकती थी।
इसके लिए डॉक्टरों ने दिल की सिलाई करने की एक तकनीक का प्रयोग कर क्षतिग्रस्त उत्तकों को हटाया। इस दौरान डॉक्टरों ने क्लिक करें दिल के आकार को कम भी किया जिससे वह ख़ून की आपूर्ति आसानी से कर सके।
यह ऑपरेशन लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल में किया गया।
हार्ट अटैक का ख़तरा
हृदय को रक्त लाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाना क्लिक करें हृदय गति के रुक जाने का एक सामान्य कारण है। इससे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है। इससे हृदय की पेशी मर जाती है और वहाँ ऐसे क्षतिग्रस्त उत्तक आ जाते हैं, जो कि धड़क नहीं सकते।
समय के साथ-साथ ये क्षतिग्रस्त उत्तक दिल के हिस्सों में फैल जाते हैं, इससे दिल के अंदर सूखे उत्तकों के चलते जगह ज़्यादा हो जाती है। इस वजह से क्लिक करें हृदय को हर धड़कन के साथ अधिक ख़ून की आपूर्ति करनी पड़ती है।
इस सबका प्रभाव यह होता है कि दिल कमज़ोर हो जाता है, उसके काम करने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में आदमी सीढ़ियाँ चढ़ने में हांफने लगता है।
क्षतिग्रस्त उत्तक
इस ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने एक तार का उपयोग किया। तार के जरिए पेशियों को कसा गया और क्लिक करें हृदय के दीवारों की मरम्मत की गई।
इस तरह डॉक्टरों ने क्षतिग्रस्त उत्तकों को हटा दिया। उन्होंने हृदय के एक कक्ष का आकार भी चौथाई घटा दिया।
जिस मरीज का यह ऑपरेशन किया गया वो हैं दक्षिण-पूर्व लंदन निवासी 58 साल के सेवकेट गूचर। ऑपरेशन के बाद उनके दिल के कामकाज में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।
किंग्स कॉलेज अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर ओल्फ़ वेंडलर ने बीबीसी से कहा, '' ब्रिटेन में इस तकनीक का उपयोग हमने पहली बार किया है, इसके किसी के हृदय को रोकने या उसे हार्ट लंग मशीन में रखने की ज़रूरत भी नहीं होती है। '' उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया कम दर्दनाक और कम आक्रामक है।
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर प्रोफ़ेसर जर्मी पियर्सन ने कहा, '' इस परीक्षण के नतीजे बताएंगे कि यह प्रायोगिक प्रक्रिया सुरक्षित है की नहीं।''