मेलेनोमा कैंसर के शिकार लोगों के लिए राहत
मेलेनोमा, स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक प्रकारों में से एक है। इससे जूझ रहे मरीजों के लिए जल्द ही एक नई वैक्सीन उम्मीद की किरण बन सकती है। इस वैक्सीन को हर मरीज के कैंसर के हिसाब से अलग-अलग तैयार किया जाता है। बड़े स्तर पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में इसके उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। अध्ययन के मुताबिक, इस वैक्सीन को इम्यूनोथेरेपी के साथ देने पर कैंसर के दोबारा लौटने या शरीर के दूसरे अंगों तक फैलने का खतरा 50% तक कम देखा गया।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के अनुसार, दुनियाभर में मेलेनोमा के लगभग 3.40 नए मामले सामने आते है और इस बीमारी से लगभग 60,000 लोगों की मौत जाती है। यह त्वचा के कैंसर का एक आक्रामक प्रकार है, जो तेजी से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है।
जब कैंसर पास की लिम्फ नोड्स या फेफड़ों, लिवर और दिमाग जैसे दूर के अंगों तक फैल जाता है, तो इससे मरीजों के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में केवल 40 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। इस तरह के खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने नई वैक्सीन के बारे में जानकारी दी है।
स्किन कैंसर की नई वैक्सीन
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इंटिस्मेरान वैक्सीन के बारे में जानिए
इंटिस्मेरान नाम की इस वैक्सीन पर काम कर रहे शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके नतीजे कैंसर के इलाज के एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं।
- ट्रायल में पाया गया कि इम्यूनोथेरेपी के साथ वैक्सीन देने से दो साल के दौरान मेलेनोमा के दोबारा लौटने या फैलने का खतरा केवल इम्यूनोथेरेपी लेने वाले मरीजों की तुलना में 38 प्रतिशत तक कम हुआ।
- यह पहली ऐसी पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन है, जिसने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में सकारात्मक नतीजे दिखाए हैं।
- यहां समझना जरूरी है कि तीसरे चरण का ट्रायल किसी इलाज की प्रभावशीलता और सुरक्षा को बड़ी संख्या में मरीजों पर परखने का महत्वपूर्ण चरण होता है।
कैंसर रिसर्च यूके की रिसर्च डायरेक्टर डॉ. कैथरीन इलियट ने इन नतीजों को उत्साहजनक बताया। वह कहती हैं, इससे सर्जरी के बाद मरीजों में दोबारा कैंसर होने की टेंशन को खत्म किया जा सकता है। हर व्यक्ति का कैंसर दूसरे लोगों से अलग हो सकता है। इसलिए मरीज की जरूरत के मुताबिक इलाज तैयार करने पर शोध करना बेहद जरूरी है।
वैक्सीन के दिखे अच्छे परिणाम
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कैसे किया गया वैक्सीन का ट्रायल?
इस अध्ययन के नतीजे यूरोपियन सोसाइटी फॉर मेडिकल ऑन्कोलॉजी के कैंसर सम्मेलन में पेश किए जाने हैं। इस ट्रायल में कुल 1,137 मरीज शामिल हुए। इन सभी का कैंसर सर्जरी के जरिए निकाल दिया गया था, लेकिन डॉक्टरों को आशंका थी कि भविष्य में बीमारी दोबारा लौट सकती है।
सभी मरीजों को एक साल तक पेम्ब्रोलिजुमैबनाम की इम्यूनोथेरेपी दवा दी गई। इम्यूनोथेरेपी ऐसा इलाज है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करता है। गौरतलब है कि मेलेनोमा के इलाज में इम्यूनोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, यह हर मरीज पर समान रूप से असर नहीं करती।
कुछ मामलों में कैंसर कोशिकाएं इलाज के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेती हैं। वे दवा के असर से बचने लगती हैं और इलाज का प्रभाव कम हो सकता है। इसी वजह से शोधकर्ता इम्यूनोथेरेपी के साथ कैंसर वैक्सीन देने की संभावना तलाश रहे हैं।
- ट्रायल में लगभग दो-तिहाई मरीजों को इम्यूनोथेरेपी के साथ इंटिस्मेरान वैक्सीन भी दी गई। बाकी मरीजों को असली वैक्सीन के बजाय प्लेसिबो दिया गया।
- इस अध्ययन में पाया गया कि इलाज के दो साल बाद वैक्सीन लेने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा लौटने या दूसरे अंगों तक फैलने की आशंका 42 प्रतिशत कम थी।
- हालांकि, वैक्सीन के कुछ साइड इफेक्ट भी सामने आए। हर 100 मरीजों में लगभग छह मरीजों को इलाज से जुड़े दुष्प्रभाव हुए। इनमें बुखार, थकान और इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर प्रतिक्रिया होना शामिल था।
मरीज के कैंसर के हिसाब से कैसे तैयार होती है वैक्सीन?
इंटिस्मेरान की सबसे खास बात यह है कि इसे हर मरीज के ट्यूमर की आनुवंशिक जानकारी के आधार पर तैयार किया जाता है।
- हर कैंसर में कुछ ऐसे आनुवंशिक संकेत या बदलाव होते हैं, जो उसकी पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
- वैक्सीन तैयार करने के लिए मरीज के ट्यूमर से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि उसका इम्यून सिस्टम कैंसर कोशिकाओं को बेहतर ढंग से पहचानना सीख सके।
- अगर इलाज के बाद कैंसर कोशिकाएं शरीर में बच जाती हैं और दोबारा बढ़ने लगती हैं, तो पहले से ही तैयार इम्यून सिस्टम उन्हें पहचानकर उन पर हमला करने में मदद कर सकता है।
- यानी इस वैक्सीन का मकसद केवल कैंसर का इलाज करना नहीं, बल्कि उसके दोबारा लौटने की आशंका कम करना भी है।
इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च, लंदन के प्रोफेसर एलन मेल्चर ने कहा कि फिलहाल मेलेनोमा के इलाज में इस तरह की वैक्सीन आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, लेकिन दूसरे कैंसर में भी इसकी संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। हम किडनी, ब्लैडर (मूत्राशय) और फेफड़ों का कैंसर पर भी इसी तरह से काम करने की कोशिशों में हैं।
हालांकि, अभी यह समझना जरूरी है कि किस प्रकार के कैंसर में यह तरीका सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, किन मरीजों को इससे अधिक लाभ मिल सकता है और कैंसर कोशिकाओं के किन आनुवंशिक संकेतों को निशाना बनाना सबसे प्रभावी रहेगा?
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स्रोत:
Moderna cancer vaccine stops melanoma returning: what’s next for personalized treatments?
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