फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व पर्यावरण दिवस: इलेक्ट्रिक व्हीकल्स आज की ही नहीं भविष्य की भी जरूरत, पर्यावरण के लिए इसे बढ़ावा देना जरूरी

सार

आज के सन्दर्भ में इलेक्ट्रिक व्हीकल न सिर्फ पर्यावरण की इस विकराल समस्या का हल हैं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के असर को भी कम करते हैं। 
विज्ञापन
विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण की लें शपथ - फोटो : amarujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आज विश्व पर्यावरण दिवस है, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने और उन तौर तरीकों को प्रोत्साहित करने का है जिससे पर्यावरण सुरक्षित रह सके। आज प्रदूषण एक गंभीर समस्या हैं जो न सिर्फ हमारे आज को नष्ट कर रही हैं बल्कि ग्लोबल वार्मिंग को भी बढ़ा रही है, जिससे पूरी पृथ्वी के जलवायु में बहुत अधिक परिवर्तन आ गया हैं।

विज्ञापन


अगर दिल्ली  ने 1951 के बाद से इस साल अपना दूसरा सबसे गर्म अप्रैल दर्ज किया, या उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी क्षेत्रों सहित अन्य उत्तर भारतीय राज्यों में भी इस मौसम में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया तो यह सब प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग की ही देन है।  

अभी कुछ दिन पहले ही आई अमेरिकी जलवायु एजेंसी  नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट में भी कहा गया हैं कि पिछले 40 लाख सालों की तुलना में अब वातावरण में सबसे ज्यादा कार्बन डाईऑक्साइड है और जिसकी मुख्य वजह दुनिया भर में बिजली संयंत्रों, ऑटोमोबाइल और अन्य स्रोतों से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का वायुमंडल में छोड़ा जाना है। 
विज्ञापन


भारत के लिए चुनौतियां

भारत जैसे देश में, जोकि विश्व के सर्वाधिक वायु प्रदूषित देशों में से एक है, यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जहां एक तरफ हमारी अर्थव्यवस्था विकास की ओर अग्रसर है तो वहीं दूसरी तरफ शहरी विकास, वाहनों की बढ़ती संख्या वायु प्रदूषण को बढ़ाती जा रही है।

हमारे कुछ बड़े शहर पहले से ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। सरकार ने भी अब वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में कुछ सार्थक कदम उठाए हैं, चाहे वह नेशनल एयर क्लीन प्रोग्रमम हो या इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना। 

आज देश में दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और पश्चिम बंगाल समेत 16 राज्य अपनी ईवी नीतियों को अंतिम रूप दे चुके हैं। कई राज्य सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की सब्सिडी को बढ़ाने के लिए छूट भी दे रही हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी तो सालों से इसे ले कर बहुत मुखर हैं। सिर्फ सरकार ही नहीं, आज प्राइवेट कम्पनीज, कॉर्पोरेट ग्रुप्स भी बढ़-चढ़ कर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के विस्तारीकरण में अपना योगदान दे रहे हैं। जिससे न सिर्फ रोज नए गाड़ियों के मॉडल आ रहे हैं बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी तेजी से विकास हो रहा हैं। 
 

इन सभी प्रयासों का असर दिख भी रहा है। एक सरकारी अधिसूचना के मुताबिक भारत में 8,70,141 ईवी पंजीकृत हो चुके हैं। 2021 में भारत में 3,29,190 ईवी रजिस्टर हो चुके हैं जबकि 2020 में यह आकंड़ा सिर्फ 1,22,607 का था। 

विज्ञापन

इलेक्टिक गाड़ियां पर्यावरण के लिए अच्छी - फोटो : Pixabay
आज के सन्दर्भ में इलेक्ट्रिक व्हीकल न सिर्फ पर्यावरण की इस विकराल समस्या का हल है, बल्कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के असर को भी कम करते हैं।
द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीटयूट (टेरी) के अनुमानों के मुताबिक 2030 में ई (इलेक्ट्रिक) वाहनों की पहुंच का विस्तार करने की रणनीति अपनाने से ऊर्जा की जरूरत में 14 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। वही अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक राकी माउंटेन इंस्टिट्यूट (आरएमआइ) इंडिया के अनुसार दिल्ली में पंजीकृत डिलीवरी वाहनों से 2019 में तकरीबन 700,000 टन कार्बन उत्सर्जन हुआ। अगर 2030 तक इन सब वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदल दिया जाता है तो कुल मिलाकर 140 टन पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और 12,000 टन से अधिक नाइट्रोजन आक्साइड (नाक्स) कम हो जाएगा।

इससे यह प्रतीत होता है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स न सिर्फ ऊर्जा जरूरतों जैसे की पेट्रोलियम के इम्पोर्ट को कम करेंगे बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेंगे। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बढ़ने से सीधे-सीधे पर्यावरण को फायदा होगा।  

हालांकि भारत में अभी भी इलेक्ट्रिक वाहन को लेकर जागरूकता में थोड़ी कमी है, खासकर चार्जिंग के बुनियादी ढांचे और ईवी की रेंज को ले कर, लेकिन यह समस्या हर उस सेक्टर के साथ आती है जब वह विकसित होने की ओर अग्रसर होता हैं।

जिन्होंने मोबाइल की शुरुआती क्रांति को देखा होगा, उन्हें याद होगा की कैसे लैंडलाइन से शुरू हुआ सफर, इनकमिंग कॉल के पैसे देने से लेकर कीपैड वाले मोबाइल से टच स्क्रीन तक आ गया। थोड़े से इंटरनेट के लिए महंगा रिचार्ज करवाने से ले कर आज महीने के रिचार्ज में अनलिमिटेड डाटा तक पहुंच गया। 

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बढ़ती मांग

आज इलेक्ट्रिक व्हीकल्स भी उन शुरुआती चुनौतियों से आगे बढ़ कर तेजी से आगे बढ़ रहा है। तभी तो अब रिक्शे के साथ साथ ई-रिक्शा भी आपको दिख ही जाता है, अब इलेक्ट्रिक टू व्हीलर भी आस पास से सामान लाने से आगे बढ़ कर ऑफिस आने -जाने में भी काम आ रहे हैं।

अब आपको सिर्फ इलेक्ट्रिक कैब बुक करने का भी ऑप्शन मिल रहा हैं। जहां पहले एक्का दुक्का ऑप्शन होते थे, अब आपके सामने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की भरमार हैं, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए लोन लेने की बहुत से ऑप्शन हैं।  

अगर हम सच में चाहते हैं की अपनी आने वाली पीड़ी को एक अच्छा भविष्य, खूबसूरत पृथ्वी और साफ सुथरा पर्यावरण दे कर जाएं तो हमें हमें अभी से ही अपने जीवन में इन बदलावों को लाना होगा। फिर चाहे इसकी शुरुआत हम इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को चुन कर भी कर सकते है क्यूंकि यह सिर्फ आज ही नहीं बल्कि हमारे भविष्य की भी जरूरत हैं।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें