फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World AIDS Day 2025: लाइलाज नहीं है एचआईवी संक्रमण, जानिए अब तक के सबसे प्रभावी इलाज के तरीके

Mon, 01 Dec 2025 07:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने कई ऐसी दवाओं और उपचार विधियों की खोज की है जिससे एचआईवी का इलाज आसान हो गया है।
  • आइए जानते हैं कि इस बीमारी की रोकथाम और इलाज में अब तक क्या प्रगति हुई है और कौन से उपचार विकल्प मौजूद हैं?
विज्ञापन
एचआईवी का इलाज - फोटो : Amarujala.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वैश्विक स्तर पर कई गंभीर बीमारियों का जोखिम लगातार बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। कैंसर हो या हृदय रोग, डायबिटीज हो या फेफड़ों की बीमारी, इन सभी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ा है। इन बीमारियों के साथ एचआईवी का बढ़ता संक्रमण भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण है, इससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।

विज्ञापन


ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) का संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना कमजोर कर देता है कि रोगी के लिए बीमारियों से मुकाबला कर पाना कठिन हो जाता है। एचआईवी संक्रमण के कारण एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम का खतरा होता है।

कुछ दशकों पहले तक एड्स को लाइलाज बीमारी माना जाता था, हालांकि वैज्ञानिक शोध और कारगर दवाओं ने इसके इलाज को आसान बना दिया है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए भी व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप इस संक्रमण के फैलने की गति को भी नियंत्रित करने में मदद मिली है। 
विज्ञापन


साल 2024 के आखिर तक दुनियाभर में लगभग 40.8 मिलियन (4 करोड़ से अधिक) लोग एचआईवी के साथ जी रहे थे। इस साल 13 लाख नए मामले भी सामने आए जबकि 6.30 लाख लोगों की इस संक्रमण से मौत भी हो गई थी।

विश्व एड्स दिवस 2025 - फोटो : Freepik.com
अब लाइलाज नहीं है एचआईवी संक्रमण

एचआईवी-एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने, एड्स के मरीजों की जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और उन्हें सामाजिक भेदभाव से बचाने के उद्देश्य के साथ हर साल एक दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है।

हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने कई ऐसी दवाओं और उपचार विधियों की खोज की है जिससे इसका इलाज आसान हो गया है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी की रोकथाम और इलाज में अब तक क्या प्रगति हुई है और कौन से उपचार विकल्प मौजूद हैं?

एचआईवी संक्रमण और इसका इलाज - फोटो : Freepik.com
लेनाकापाविर इंजेक्शन संक्रमण रोकने में 96% तक असरदार

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में लेनाकापाविर (एंटीरेट्रोवायरल दवा) के उपयोग को  एचआईवी संक्रमण रोकने में 96% से अधिक प्रभावी पाया गया था। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ये इंजेक्शन, रोजाना एमट्रिसिटाबाइन-टेनोफोविर डिसोप्रॉक्सिल फ्यूमरेट (ट्रूवाडा) दवा लेने से अधिक प्रभावी है। इस दवा का उपयोग एचआईवी-1 के उपचार और एचआईवी होने के जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है।

वैज्ञानिकों ने बताया था कि साल में दो बार (हर छह महीने में) लेनाकेपाविर इंजेक्शन की मदद से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। तीसरे चरण के परीक्षण में पाया गया था लेनाकापाविर इंजेक्शन एचआईवी की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक हो सकता है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट

एचआईवी के इलाज में मिली कामयाबी - फोटो : adobe stock images
एमआरएनए तकनीक को वैज्ञानिकों ने पाया असरदार

जून 2025 में वैज्ञानिकों की एक अन्य टीम ने एचआईवी के इलाज में एक और कदम आगे बढ़ने की जानकारी साझा की थी। शोधकर्ताओं ने शरीर की कोशिकाओं के अंदर छिपे वायरस को बाहर निकालने का एक नया तरीका ढूंढने का दावा किया था।

वैज्ञानिकों ने बताया कि वायरस कुछ खास व्हाइट ब्लड सेल्स के अंदर खुद को छिपाने की क्षमता वाला होता है। इस संक्रमण का इलाज ढूंढ रहे वैज्ञानिकों के लिए ये मुख्य चुनौतियों में से एक रही है।

नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में, वैज्ञानिकों ने पहली बार बताया था कि है कि एमआरएनए (mRNA) तकनीक की मदद से उन कोशिकाओं में पहुंचाया जा सकता है जहां एचआईवी का वायरस छिपा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा, अगले चरण के अध्ययन में वायरस को वहीं पर मारने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विज्ञापन

एचआईवी संक्रमण और इसका इलाज - फोटो : Adobe Stock Images
एचआईवी को शरीर में प्रवेश से रोकने वाली एंटीबॉडी

इसके अलावा हाल ही में जर्मनी के कोलोन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल द्वारा एचआईवी संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी की खोज से इलाज की नई उम्मीद जगी है। इससे वायरस के खिलाफ लड़ाई में और मजबूती मिलने की  आस जगी है।

वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर फ्लोरियन क्लेन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की टीम ने 32 लोगों के ब्लड सैंपल की जांच की। वे सभी एचआईवी से संक्रमित थे, लेकिन उन्होंने बिना किसी मेडिकल मदद के अपने आप ही वायरस के खिलाफ एक खास तौर पर मजबूत और काफी असरदार एंटीबॉडी रिस्पॉन्स विकसित कर लिया था।

शोधकर्ताओ ने इन ब्लड सैंपल से 800 से ज्यादा अलग-अलग एंटीबॉडी को HIV को खत्म करने की उनकी क्षमता के लिए टेस्ट किया। इसमें से एक (04_A06) एंटीबॉडी को सबसे अलग पाया गया। ये एंटीबॉडी उस जगह को ब्लॉक कर देती है जहां वायरस किसी व्यक्ति को संक्रमित करते समय कोशिकाओं से जुड़ता है। इसे भी भविष्य में एचआईवी संक्रमण के इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




--------------------------
स्रोत
Profiling of HIV-1 elite neutralizer cohort reveals a CD4bs bnAb for HIV-1 prevention and therapy


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें