भारतीय महिलाएं रोगों का इलाज करवाने में काफी पीछे
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समय पर इलाज नहीं करा पाती हैं महिलाएं
मंगलवार (11 मार्च) को आयोजित एक कार्यक्रम में एशिया पैसिफिक एडवाइजरी कॉउन्सिल की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा ने इन्क्लूसिव और लैंगिक रूप से संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, अब भी भारतीय महिलाएं रोगों का इलाज करवाने में काफी पीछे हैं, अधिकतर महिलाएं इन मामलों में लापरवाही करती हैं।
कार्यक्रम में एम्स की पूर्व प्रोफेसर डॉ नीरजा भटला ने कहा कि महिलाओं में एनीमिया, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर सहित दूसरी समस्याएं बढ़ रही हैं। इनका समय पर निदान और इलाज न हो पाने के कारण रोग के गंभीर रूप लेने और इलाज में जटिलाओं का खतरा और भी बढ़ जाता है।
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महिलाओं में बढ़ते कैंसर के मामले
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, महिलाओं के स्वास्थ्य को अभी भी मुख्यरूप से जानकारी की कमी के कारण काफी हद तक नजरअंदाज किया जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी एक बड़ी चुनौती रही है। हमें महिलाओं को उनके स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सशक्त बनाने के लिए व्यावहारिक बदलाव लाने की आवश्यकता है। डॉ. शेली महाजन ने कहा कि डेटा एनालिटिक्स से संचालित सटीक डायग्नोस्टिक जल्दी पहचान और उपचार योजना को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर बना सकता है।
ब्रेस्ट हो या सर्वाइकल कैंसर, इनका अगर समय रहते निदान और उपचार हो जाए तो रोग के गंभीर रूप लेने और रोगी की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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मासिक धर्म और इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं
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सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती
इससे पहले जनवरी में सुलभ सेनिटेशन मिशन फाउंडेशन ने एक सर्वे की रिपोर्ट में बताया कि देश में महिला चिकित्सकों की कमी के चलते करीब 91% महिलाएं मासिक धर्म और इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का परामर्श नहीं ले पाती हैं। मासिक धर्म के दौरान लड़कियों ने स्कूल के शौचालयों के उपयोग करने में डर की बात स्वीकार की है क्योंकि इनकी गुणवत्ता खराब होती है। इसके कारण मासिक धर्म के दौरान बड़ी संख्या में लड़कियां अनुपस्थित रहती हैं।
समय से पहले बढ़ रहा मेनोपॉज का खतरा
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समय से पहले रजोनिवृत्ति होना चिंताजनक
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पिछले दशकों की तुलना में अब महिलाओं में समय से पहले रजोनिवृत्ति देखी जा रही जिसके कारण भी स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखा जा रहा है।
भारत में 30 से 49 वर्ष की आयु की 15% महिलाओं में रजोनिवृत्ति की स्थिति देखी जा रही है जबकि इसका समय मुख्यरूप से 55 वर्ष माना जाता रहा है। कुछ महिलाओं को 40 वर्ष की आयु से पहले ही इसका अनुभव हो रहा है।
समय से पहले रजोनिवृत्ति एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि इससे हृदय, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके लिए कई प्रकार के पर्यावरणीय और लाइफस्टाइल से संबंधित स्थितियों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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