अफवाहें दूर करने में एनजीओ की भूमिका
यूनिसेफ द्वारा समर्थित एक गैर सरकारी संगठन 'जन चेतना संस्थान' की ऋचा औदिच्य ने बताया कि यह संस्थान गरासिया महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर काम करता है। हालांकि सदी की शुरुआत के बाद से इस दिशा में की गई सारी प्रगति महामारी के कारण धुल जाने के खतरे में थी। इसके अलावा टीके के कारण प्रजनन क्षमता व दीर्घायु पर असर होने की दुष्प्रचार युक्त साजिशें भी गरासिया समुदाय में पैठ बनाए हुए थीं। इसलिए इस समुदाय के लोगों का टीकाकरण सभी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। सिविल सोसायटी से लेकर लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए भी जनजाति को टीकों की खुराक लेने के लिए तैयार करना और उन तक टीके पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
सरकारी स्तर पर प्रयास
गरासिया बस्तियां आमतौर पर विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई हैं, उनके मकान ज्यादातर पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों को दो तरह का दृष्टिकोण अपनाना पड़ा। एक स्थानीय कार्यकर्ताओं को शामिल करना और दूसरा राज्य सरकार से प्रोत्साहन दिलाना। सरकारी अधिकारियों को राशन की दुकानों पर तैनात किया गया, यहां आसानी से लोग मिल जाते हैं। यहां टीकाकरण रिकॉर्ड में लोगों के नाम की तस्दीक की गई। वहीं, नागरिकों में टीके के प्रति विश्वास कायम करने के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, प्रभावशाली समुदाय के नेताओं, पुजारियों और परंपरागत चिकित्सकों तथा समुदाय की सम्मानित हस्तियों को पहले टीका लगाया गया। अबू रोड ब्लॉक में आज पहली खुराक पाने वालों की टीकाकरण दर 93 फीसदी और दोनों खुराक पाने वालों की दर 81 फीसदी है। नियमित टीकाकरण एक बार फिर तेज हो गया है और कोविड टीकाकरण की दिशा में लगातार प्रगति हुई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं वंचितों तक पहुंचाना
यूनिसेफ टीकाकरण में भारत सरकार के साथ साझेदारी कर रहा है। टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं वंचित बच्चों और समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए। यह सुनिश्चित कराने के लिए योजना, उनके कार्यान्यन और विभिन्न रणनीतियों की निगरानी के जरिए यूनिसेफ ऐसे वंचितों की पहचान कर आवश्यक स्वास्थ्य और टीकाकरण सेवाओं को जारी रखने के उद्देश्य का समर्थन कर रहा है। भारत सरकार की साझेदारी ने समुदायों के बीच बच्चों का टीकाकरण करने और नियमित टीकाकरण को मजबूत करने के लिए जागरूकता और विश्वास पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सिर्फ जानकारी देने से ज्यादा जरूरी होता है लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना। इसके लिए अंदरूनी नजरिया समझने की जरूरत होती है। हम जो करते हैं और जिस पर यकीन करते हैं, उसके बीच में करीबी संबंध होता है। लोग जो करते हैं, उन्हें उनकी आस्था या यकीन के नजरिए से देखना होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उनके व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है। लोगों के व्यवहार में सार्थक और गहन बदलाव लाने वाले वार्तालाप का समर्थक किया जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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