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अध्ययन की चेतावनी: जिस तरफ कभी नहीं गया ध्यान, उससे भी बढ़ रहा लोगों में गले-सिर के कैंसर का खतरा

Mon, 26 Oct 2026 01:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Wildfire Smoke And Cancer: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अध्ययन में जंगलों की आग के धुएं से सिर व गर्दन के कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में अलर्ट किया गया है। धुएं में मौजूद पीएम2.5 जैसे बारीक कण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। हालांकि, अध्ययन जोखिम में बढ़ोतरी को दर्शाता है, कैंसर होना निश्चित नहीं करता।
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सिर और गले में कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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कैंसर के बढ़ते मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। हर साल इससे लाखों लोगों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल कैंसर के कारण लगभग 10 मिलियन (एक करोड़) मौतें होती हैं, यानी हर छह मौतों में से लगभग एक मौत के पीछे यही जानलेवा बीमारी कारण हो सकती है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के अलावा आनुवांशिक स्थितियों को कैंसर का सबसे बड़ा कारण मानते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कई और स्थितियां भी ऐसी हैं जो इस बीमारी के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं?

एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हर साल दुनियाभर के जंगलों में लगने वाली आग को भी कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ाने वाला पाया है। जंगलों में लगने वाली आग का खतरा सिर्फ पेड़ों, वन्यजीवों और घरों के जलने तक सीमित नहीं है। इससे निकलने वाला धुआं इंसानी सेहत पर भी लंबे समय तक असर डाल सकता है। अध्ययन में आशंका जताई गई है कि जंगलों की आग से होने वाला वायु प्रदूषण सिर और गर्दन के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। 
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आइए जान लेते हैं कि जंगल की आग से क्या खतरे हो सकते हैं और इससे कैंसर का क्या लिंक पाया गया है?

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यूरोप में जंगल की आग - फोटो : PTI
जंगल में आग की घटनाएं और इसके खतरे

दुनियाभर में हर साल जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं और इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान-माल को खतरा होता है।

एक नई समीक्षा के अनुसार, 2025 में लगी जंगल की आग अब तक की सबसे महंगी साबित हुई। कनाडा, अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया में लगी आग के कारण तीन लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा और 90 से अधिक लोगों की मौत हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ने वाला सूखा, हीटवेव (लू) और जंगली इलाकों और शहरी क्षेत्रों की सीमाओं पर बढ़ता विकास, भीषण आग के खतरों को बढ़ा रहा है।

जंगल की आग कई दिनों तक चलती रहती है और इससे बड़ी संख्या में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की आग के धुएं में पीएम 2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषक कण हो सकते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे सिर्फ सांस की ही नहीं, बल्कि दिल की बीमारियों, हड्डियों की समस्याओं सहित कई प्रकार के कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

वायु प्रदूषण और पीएम 2.5 के जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
अध्ययन में क्या पता चला?

हालिया रिपोर्ट्स में पाया गया है कि इस साल गर्मियों में बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में रिकॉर्ड संख्या में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। मेडिकल जर्नल द लैरींगोस्कोप में प्रकाशित इस अध्ययन में आशंका जताई गई है कि जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं आने वाले समय में सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी की वजह बन सकता है। इसका मुख्य कारण आग से पैदा होने वाला वायु प्रदूषण है। 

अध्ययन के मुताबिक, जंगलों में लगी आग से निकलने वाला प्रदूषण ट्रैफिक के धुएं की तुलना में स्वास्थ्य के लिए 10 गुना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। 
 
  • जंगलों की आग के धुएं में पीएम 2.5 जैसे बेहद बारीक कण अधिक मात्रा में हो सकते हैं। 
  • ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं। इनमें ऐसे कण भी हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
  • इन जहरीले कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से गले, सिर और गर्दन के कुछ हिस्सों में कैंसर होने का जोखिम बढ़ सकता है। 
  • गौरतलब है कि पीएम 2.5 का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। यानी ये इंसान के बाल की मोटाई से भी बहुत छोटे होते हैं और फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं।
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गले में कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
सिर व गर्दन के कैंसर का खतरा

ब्रिटेन और यूरोप में इस साल जंगलों में लगी विनाशकारी आग सबसे गंभीर आग की घटनाओं में से एक थी। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जंगलों में आग लगने की घटनाओं और सिर-गर्दन के कैंसर के मामलों से जुड़े 16 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि जंगलों की आग से पैदा होने वाले धुएं के संपर्क में रहने से कैंसर का जोखिम कितना बढ़ जाता है?
 
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि जंगलों की आग के धुएं से होने वाले प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों में सिर और गर्दन के कैंसर का जोखिम 6 प्रतिशत अधिक था। 
  • वहीं, जिन लोगों को हर साल इस तरह के प्रदूषण का सामना करना पड़ा, उनमें यह जोखिम बढ़कर 41 प्रतिशत तक देखा गया।

शोधकर्ताओं ने बताया कि ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जोखिमों में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि धुएं के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा, पर इससे खतरा जरूर बढ़ जाता है। किसी व्यक्ति में कैंसर होने की आशंका उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, धूम्रपान जैसे दूसरे जोखिम कारकों और प्रदूषण के संपर्क की मात्रा पर भी निर्भर करती है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ये नतीजे उन बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों को और मजबूत करते हैं, जो जंगलों की आग से होने वाले वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताती रही हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्रदूषण से लोगों की सुरक्षा के लिए नियमों को मजबूत करने की जरूरत है।



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स्रोत: 
Wildfire Air Pollution Exposure and Head and Neck Cancer Incidence.


अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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