जिंदगी में कभी-कभी आदमी अचानक नकारात्मक ऊर्जा की ओर चला जाता है। क्लैप्टोमेनिया कुछ ऐसा ही है। इसमें चोरी करने के बाद आदमी को अपूर्व खुशी का अनुभव होता है। क्लैप्टोमेनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी वस्तु को चुराने की प्रवृत्ति रखता है, जो कि भले ही उसके व्यक्तिगत इस्तेमाल की न हो या फिर उस व्यक्ति के लिए उसका कोई महत्व न हो। यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकार है। अगर इसका उपचार न किया जाए तो ऐसी स्थिति में पीडि़त व्यक्ति खुद को एवं अपने प्रियजनों को बहुत भावनात्मक कष्ट पहुंचाता है।
मानसिक रोग चिकित्सा के अनुसार, कलैप्टोमेनिया एक आवेग नियंत्रण विकार है। इस विकार की कुछ मुख्य विशेषता इस बात की ओर इशारा करती है कि क्लैप्टोमेनिया एक प्रकार का झक एवं सनक से संबंधित विकार हो सकता है। इसमें व्यक्ति चोरी करने से पहले तनाव महसूस करता है और चोरी करने के बाद खुशी, संतुष्टि एवं राहत महसूस करता है। व्यक्ति गुस्सा, प्रतिशोध या भ्रम के प्रभाव में चोरी नहीं करता है, बल्कि उन्माद वाली स्थिति या असामाजिक व्यक्तित्व के कारण करता है। यह भावनात्मक समस्या एवं व्यवहार का स्वयं नियंत्रण से संबंधित विशेषता वाला विकार होता है।
क्लैप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति आमतौर पर चोरी की योजना नहीं बनाता है और न ही डर के बारे में विचार करता है। यह पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। यह अनुवांशिक भी होता है। क्लैप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति आमतौर पर अचानक, बिना योजना बनाए एवं बिना किसी दूसरे व्यक्ति की मदद से कोई चीज चुराता है। इससे पीड़ित व्यक्ति आमतौर पर सार्वजनिक स्थल जैसे स्टोर्स एवं सुपर मार्केट्स में चोरी करते हैं। ऐसे कुछ व्यक्ति दोस्तों या जान-पहचान वाले व्यक्ति के किसी समारोह आदि में भी चोरी करते हैं।
ऐसे व्यक्ति की चोरी करने की चाहत या आवेग इतना जबरदस्त होता है कि वह उसका विरोध नहीं कर पाता है। चोरी के व्यवहार से संबंधित विशेषता व्यक्ति में दूसरी समस्या भी उत्पन्न करती है, जैसे समाज से अलग-थलग हो जाना एवं मादक पदार्थों का सेवन आदि। सामान्य चोरी एवं क्लैप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति के चोरी करने में अंतर होता है। सामान्य चोरी चाहे योजनाबद्ध तरीके से की गई हो या आवेग में, हमेशा उसकी उपयोगिता एवं आर्थिक फायदे के कारण होती है या उससे प्रेरित होती है जबकि क्लैप्टोमेनिया में व्यक्ति ऐसी चीजों की चोरी करता है, जो उसके किसी काम की नहीं होती।
यह बीमारी किसी भी आयु में हो सकती है। यह बचपन से लेकर जवानी तक और कम मात्रा में उम्रदराज व्यक्तियों में भी देखने को मिल जाती है। इसकी पहचान केवल बीमारी के लक्षणों के द्वारा ही की जाती है। बीमारी को पहचानने के लिए कोई जांच नहीं होती है। ऐसी स्थितियों की सूची जिनके प्रभाव से क्लैप्टोमेनिया की स्थिति उभर आती है, की समीक्षा करनी चाहिए। यह बिना उपचार के अपने आप ठीक नहीं होती है। यह लंबे समय तक और लगातार चलने वाली स्थिति होती है। इसका उपचार दवाओं एवं मनोचिकित्सा द्वारा किया जाता है। अभी तक इसका मानक वाला या एकदम सही उपचार नहीं मिल पाया है।
शोधकर्ता अभी भी उचित एवं प्रभावशाली उपचार ढूंढने में लगे हैं। संभावित इलाज में व्यवहार परिवर्तन चिकित्सा, पारिवारिक उपचार चिकित्सा संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार एवं मनोविज्ञान चिकित्सा शामिल है। इसके उपचार में सिरोटोनिन युक्त दवाएं, जो अवसादग्रस्त व्यक्तियों को दी जाती है, का इस्तेमाल किया जाता है। विद्युत चिकित्सा, लिथियम एवं वेलप्रोइक एसिड भी इसके उपचार में इस्तेमाल की जाती है। क्लैप्टोमेनिया का बार-बार उभरना कोई असामान्य बात नहीं है। अगर आप चोरी की इच्छा से पीड़ित हैं, तब मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित उपचार कराना चाहिए।