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टहलना है सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद, इन बीमारियों से रखता है दूर

Mon, 24 Aug 2020 03:24 PM IST
सोनू शर्मा शिवजीत घाटगे
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पिछले कुछ सालों में फिटनेस को बेहतर बनाने के तमाम तरीके सामने आए हैं। वैसे ज्यादातर लोग टहलने को कम करके आंकते हैं। जिम, पिलाटिस, क्रॉस-फिट इत्यादि की लोकप्रियता समय के साथ बढ़ी है। इसके लिए मार्केटिंग को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जिसने फिटनेस के वैश्विक मानदंडों को आवश्यक मूल्यों की तरह पेश किया। लेकिन इन वैश्विक मानदंडों के मायने महज फिट रहने तक सीमित नहीं थे। फिटनेस के मामले में अंतराष्ट्रीय प्रवृत्तियों को अपनाने के पीछे कई कारण छिपे हुए हैं, जिन्होंने भारत में भी पैर पसारने की कोशिशें कीं।

भारत की संस्कृति कुछ ऐसी रही है, जिसमें फिटनेस के परंपरागत रूपों को हमेशा ज्यादा महत्व दिया गया है। इनमें योग, दौड़ना और टहलना भारतीय लोगों के पसंदीदा व्यायाम रहे हैं। लेकिन अब व्यायाम के ये परंपरागत तरीके अपनी चमक खो रहे हैं। हालांकि यह नहीं भूलना चाहिए कि व्यायाम के ये परंपरागत तौर-तरीके लंबे समय के लिए फायदेमंद होते हैं।

इनमें कोई खास पैसा नहीं लगता और संपूर्ण फिटनेस को बनाए रखने में कई अन्य फायदे होते हैं। आज के दौर में योग और दौड़ना तो फिर भी लोकप्रिय हैं, लेकिन टहलने की महत्ता कम हुई है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों पैदल टहलना, दूसरे परंपरागत व्यायामों और हाल ही में लोकप्रिय हुए अंतराष्ट्रीय फिटनेस के रूपों से किसी मायने में कम नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शारीरिक फायदे
  • समग्र शारीरिक फिटनेस के लिए टहलना एक सरल लेकिन संपूर्ण व्यायाम है। इससे हृदय स्वस्थ रहता है, वजन कम होने में मदद मिलती है, गंभीर बीमारियों का जोखिम कम होता है, मजबूती आती है, रक्त का प्रवाह और शारीरिक बनावट बेहतर होती है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।
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  • इतना ही नहीं, इससे जोड़ स्वस्थ रहते हैं और अर्थराइटिस का खतरा कम होता है। जाहिर है कि टहलने से होने वाले शारीरिक लाभों की सूची लंबी है। इन सब लाभों के लिए बस आपको टहलने के क्रम को लगातार जारी रखना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
  • टहलना व्यायाम का सबसे प्राकृतिक ढंग है। इसके लिए किसी एक्सपर्ट से प्रशिक्षण लेने या किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। कोई भी इसे अपनी रोजमर्रा जीवन और सुविधा के अनुसार कर सकता है। आप इसे पूरे दिन में टुकड़ों में बांट सकते हैं जैसे दोनों वक्त के भोजन के बाद 20 मिनट के लिए टहल सकते हैं।
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  • जरूरत बस इतनी है कि यह नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन जाए। अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता अनिवार्य है। अगर पूरी शिद्दत के साथ टहलने का क्रम रोज जारी रखा जाए, तो यह अपने आप में एक समग्र व्यायाम बन सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
कम से कम खतरा
  • टहलने में चोट का जोखिम कम होता है। हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जो व्यायाम किए जाते हैं, उनमें टहलना एक बेहतरीन व्यायाम है। इसे आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। हालांकि लंबे समय के लाभों को पाने के लिए समझदारी इसमें है कि अपनी दूरी और गति को लगातार बढ़ाने का प्रयास किया जाए। किसी उपकरण का गलत ढंग से उपयोग करने या गलत निर्देश मिलने से चोट लगने की संभावना टहलने में कतई नहीं होती। एक व्यायाम के तौर पर टहलना किसी भी बाहरी प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र है। यह एक ऐसा व्यायाम है, जो पूरी तरह आपके शरीर की जरूरत पर आधारित हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • एक व्यायाम के तौर पर टहलना कई ढंग से किया जा सकता है। आप गति, चढ़ाई या दूरी को बढ़ाते हुए इस व्यायाम के कठिनाई के स्तर को भी बढ़ा सकते हैं। पैदल टहलने को कठिन बनाने का एक शानदार तरीका सीढ़ियां चढ़ना हो सकता है। इसके अलावा, समुद्र के किनारे टहलते हुए, पहाड़ चढ़ते हुए या पार्क में टहलते हुए प्रकृति का आनंद ले सकता है। बंद कमरे में कसरत करने से कहीं ज्यादा फायदेमंद है खुले में प्रकृति के नजदीक रहते हुए कसरत करना। यह पैदल टहलने की सबसे बड़ी खासियत है, जिसकी बराबरी फिटनेस से जुड़ा कोई भी व्यायाम नहीं कर सकता।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : एएनआई
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखता है
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, 'आपका पेशा कुछ भी हो, अगर आपको पेशेवर कुशलता हासिल करनी है, तो उसके लिए मानसिक और शारीरिक फिटनेस बेहद जरूरी है। मीटिंग कक्ष हो या बॉलीवुड, जो फिट, वही शिखर पर पहुंचेगा। अगर शरीर फिट होगा, तो दिमाग भी हिट होगा।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • यह प्रमाणित हो चुका है कि शारीरिक व्यायाम से चिंता और तनाव दूर होते हैं। टहलने से मनुष्य के शरीर और दिमाग दोनों पर जादुई असर होता है। अकेले टहलने से आत्ममंथन का मौका मिलता है, जिससे दिमाग को साफ रखने में मदद मिलती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस तरह की कसरतें कर रहे हैं। अगर आप अपनी रोजाना की दिनचर्या में 30-40 मिनट का टहलना शामिल कर लें, तो यह हर दृष्टि से अच्छा होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • टहलने से गहरी नींद आने में मदद मिलती है, जो एकाग्रता के लिए जरूरी है। टहलने के महत्व को बेशक कमतर आंका जाता हो, लेकिन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में इसके फायदों को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। इसलिए कभी भी खुद से यह सवाल न करें कि क्या टहलना आपके लिए अच्छा है? इसके बजाए संपूर्ण तंदुरुस्ती के लिए हर स्टेप पर नजर रखकर, उसकी गिनती करके टहलने के विभिन्न पहलुओं को तलाशें।
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