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Health Alert: क्या आप भी टॉयलेट में चलाते हैं मोबाइल फोन? सावधान- ये आदत पाइल्स का बढ़ा सकती है खतरा

Mon, 24 Feb 2025 01:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप भी टॉयलेट में अपना फोन लेकर जाते हैं? ये आदत संक्रामक बीमारियों के जोखिमों के अलावा पाइल्स और एनल फिस्टुला जैसी बीमारियों का भी कारण बन सकती है। डॉक्टर्स ने सभी लोगों को सावधान किया है।
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टॉयलेट में ले जाते हैं फोन? - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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मोबाइल फोन्स हमारे दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। सुबह से लेकर शाम तक हम सभी किसी न किसी काम से मोबाइल से चिपके रहते हैं। कई अध्ययन चिंता जताते रहे हैं कि मोबाइल फोन्स से लगे रहने की आदत स्क्रीन टाइम को बढ़ा रहे हैं, जिसके कारण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर हो रहा है। इसके अलावा मोबाइल फोन्स की बढ़ती लत से संबंधित एक दुष्प्रभाव को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों सभी लोगों को अलर्ट किया है।

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क्या आप भी टॉयलेट में अपना फोन लेकर जाते हैं? अगर हां, तो सावधान हो जाइए। ये आदत आपको गंभीर रूप से बीमार करने वाली हो सकती है। टॉयलेट में फोन चलाने के कारण संक्रामक बीमारियों के बढ़ने के जोखिमों के अलावा ये स्थिति आपमें पाइल्स और एनल फिस्टुला जैसी बीमारियों का भी कारण बन सकती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि जिन लोगों की ऐसी आदत है वो तुरंत सुधार कर लें। आइए इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानते हैं।

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पाइल्स के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
टॉयलेट में लंबे समय तक मोबाइल चलाने के नुकसान

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉक्टर्स ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पाइल्स और फिस्टुला के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। निष्क्रिय जीवनशैली और खराब आहार तो इसका कारण है ही साथ ही टॉयलेट में लंबे समय तक मोबाइल के इस्तेमाल को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

लाइफस्टाइल-आहार में गड़बड़ी के अलावा लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने की आदत मलाशय क्षेत्र पर अधिक दबाव बढ़ा रही है जिसकी वजह से सभी उम्र के लोगों में  पाइल्स और फिस्टुला की दिक्कत भी बढ़ रही है। 

पाइल्स और फिस्टुला की समस्या - फोटो : Freepik.com
पाइल्स और फिस्टुला की समस्या

पाइल्स और फिस्टुला दोनों ही मलाशय क्षेत्र में होने वाली समस्या मानी जाती है। पाइल्स जिसे बवासीर भी कहा जाता है, ये गुदा नलिका (एनल कैनल) की रक्त वाहिकाओं में सूजन के कारण होता है। जबकि फिस्टुला एनल कैनल में संक्रमण के कारण होने वाली समस्या है। फिस्टुला मुख्यरूप से आंतरिक हिस्से में होता है जबकि पाइल्स बाहरी या आंतरिक दोनों में हो सकता है।

अमर उजाला से बातचीत में सर्जन डॉ रमेश धीर बताते हैं,  शौचालय में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बवासीर होने का खतरा बढ़ सकता है। कमोड सीट पर लंबे समय तक बैठना मलाशय क्षेत्र में नसों पर दबाव बढ़ता है, जिसके कारण इसमें समय के साथ सूजन की दिक्कत बढ़ जाती है जिसे पाइल्स का कारण माना जाता रहा है। 

शौचालय में फोन लेकर जाना क्यों नुकसानदायक? - फोटो : Freepik.com
संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा

मोबाइल फोन्स पर रील्स देखते रहने की आदत के चलते पहले की तुलना में अब औसतन 10 मिनट लोग सीट पर बिता रहे हैं। टॉयलेट सीट्स पर रोगजनक भी अधिक होते हैं, ऐसे में शरीर के संवेदनशील जननांग हिस्सों में संक्रमण का खतरा भी अधिक हो सकता है। 

इसके अलावा  गतिहीन जीवनशैली और खराब खान-पान की आदत आपके जोखिमों को दोगुना कर देती है। कम पानी पीने, जंक फूड का अधिक सेवन और टॉयलेट में लंबे समय तक बैठने जैसी आदत मिलकर इस तरह की बीमारियों के खतरे को कई गुना तक बढ़ाने वाले हो सकते हैं। 
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शौचालय में न ले जाएं मोबाइल फोन - फोटो : Freepik.com
कहीं आपको भी तो नहीं हो गई है ये बीमारी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पाइल्स और फिस्टुला दोनों ही बीमारियां काफी आम हो गई हैं। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान और इसका इलाज प्राप्त करना बहुत जरूरी हो जाता है। पाइल्स के शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं क्योंकि यह दर्द रहित होती है, हालांकि बीमारी बढ़ने के कारण मलाशय में सूजन, खून आने और दर्द की समस्या काफी बढ़ जाती है। वहीं फिस्टुला के कारण भी आपको इसी तरह की दिक्कतें होती हैं। पर चूंकि फिस्टुला एक संक्रामक स्थिति है इसलिए आपको गुदा क्षेत्र से मवाद आने की भी समस्या हो सकती है। 

तरल पदार्थों और हाई फाइबर युक्त आहार के अधिक सेवन के साथ स्वच्छता की आदतों को बनाए रखने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। मल त्यागते समय बहुत अधिक दबाव न डालने की भी सलाह दी जाती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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