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Sushant Singh Case: जानें दिमाग को बेकाबू करने वाले ड्रग के बारे में जिससे रिया चक्रवर्ती का नाम जुड़ा

Thu, 27 Aug 2020 08:33 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sushant Singh Case - फोटो : Social Media/AmarUjala
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स कनेक्शन ने लोगों का ध्यान खींचा है। एक तरफ कथित तौर पर सुशांत द्वारा ली जाने वाली दवा (Modafinil) की चर्चा हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर रिया चक्रवर्ती के वॉट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहे हैं। इस चैट में रिया चक्रवर्ती गौरव नाम के एक व्यक्ति से जिस ड्रग के बारे में बात कर रही है, उसका नाम मिथाइलीनडाइऑक्सी मेथाम्फेटामाइन(MDMA) है। क्लिनिकलट्रायल्स डॉट जीओवी (clinicaltrials.gov) पर प्रकाशित रिसर्च स्टडी के मुताबिक यह मूड डिसऑर्डर से जुड़ी दवा है। इस रिसर्च स्टडी और विशेषज्ञों की मदद से हमने इस दवा के बारे में समझने की कोशिश की तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से: 
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ड्रग (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे
एमडीएमए (MDMA) ड्रग है क्या?
  • क्लिनिकलट्रायल्स डॉट जीओवी (clinicaltrials.gov) के मुताबिक और विशेषज्ञों के मुताबिक एमडीएमए ड्रग(3, 4-मेथेलीन डाई-ऑक्सी मेथाम्फेटामाइन) को स्टिम्युलेंट की कैटेगरी में रखा गया है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म और दिमाग से रिलीज होने हार्मोन और रसायन को बढ़ाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एमडीएमए (MDMA) सायकोट्रॉपिक और सिंथेटिक ड्रग है। सायकोएक्टिव कंपाउंड होने के कारण व्यक्ति के दिमाग मे कई तरह की प्रतिक्रियाएं होने लगती है। 
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अवसाद (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे
ड्रग का क्या असर होता है?
  • इसे लेने के बाद व्यक्ति पहले बहुत खुशी महसूस करता है, खुद को काफी ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करने लगता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे दिमाग से उसका नियंत्रण खोने लगता है। इससे व्यक्ति को एकदम थकावट महसूस नहीं होती। दवा लेनेवाला व्यक्ति हैल्युसिनेशन यानी मतिभ्रम का शिकार हो जाता है। दवा लेने के आधे घंटे से 45 मिनट बाद इस दवा का असर शुरू होता है और तीन से छह घंटे तक रहता है। 

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Depression - फोटो : pixabay
  • मनोचिकित्सक डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि यह ड्रग सीधे तौर पर दिमाग पर तेज असर करता है। ड्रग लेने पर व्यक्ति कन्फ्यूज हो जाता है, उसके सोचने-समझने की क्षमता सामान्य नहीं रह जाती। यहां तक कि उसके हाथ भी कंपकंपाते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्यों नियंत्रण खोने लगता है व्यक्ति?
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ड्रग के प्रभाव से व्यक्ति का नर्वस सिस्टम सुस्त हो जाता है और खुद पर नियंत्रण नहीं रहता। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन ड्रग अब्यूज के मुताबिक, इस ड्रग को लोग टैबलेट या कैप्सूल के रूप में लेते हैं। यह तीन तरह के हार्मोन डोपामाइन, नोरेपिनेफ्रिन और सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाता है, जिस कारण दिमाग नियंत्रण खोने लगता है। भूख और थकान महसूस नहीं होने और डिप्रेशन के कारण व्यक्ति इस ड्रग का आदी हो जाता है। इसका सेवन खतरनाक हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस ड्रग के इस्तेमाल से बचें
  • विशेषज्ञों का कहना है कि इस ड्रग की हाई डोज लेने पर शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पर असर पड़ता है। शरीर का तापमान बढ़ने पर किडनी, लिवर और हार्ट फेल्योर की संभावना रहती है। ज्यादा गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है। इस ड्रग का आदी(Drug Addiction) हो जाने पर सीधे तौर पर इसका इलाज नहीं है। हालांकि व्यवहारिक थेरेपी से आदत छुड़ाने की कोशिश की जाती है। इलाज को लेकर रिसर्च हो रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
  • विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुशांत के मामले में इस ड्रग का नाम आया है तो उसकी बॉडी की दोबारा जांच में स्पष्ट हो पाएगा कि यह ड्रग उसके शरीर में था या नहीं। विसरा रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर में कोई ड्रग नहीं था। लेकिन दोबारा इसकी जांच होने के बाद अगर रिपोर्ट निगेटिव आ जाए तो चर्चाओं पर विराम लग पाएगा। हालांकि यह जांच का विषय है। 

यह भी पढ़ें: क्या विसरा जांच से खुलेगा सुशांत की मौत का राज? जानिए क्या होता है ये

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