कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोरोना महामारी के बीच बच्चों में संक्रमण के मामले बढ़े तो वह सुपर स्प्रेडर की भूमिका में संक्रमण को और फैला सकते हैं। मैसाच्युसेट्स जनरल अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लेल यॉन्कर ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि बच्चे साइलेंट सुपर स्प्रेडर होते हैं, क्योंकि उनमें वयस्कों की तुलना में वायरल लोड अधिक होता है।
डॉ. यॉन्कर के अनुसार अभी तक यह माना जा रहा था कि वयस्क मरीजों की नाक में वायरल लोड अधिक होता है। हालांकि सच यह है कि हल्के लक्षण वाले बच्चों में वायरल लोड उन वयस्कों की तुलना में अधिक होता है जो संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। यह परिणाम 22 साल से कम उम्र के 49 कोरोना वायरस के नाक और गले से लिए गए स्वैब की जांच रिपोर्ट में सामने आया है।
संक्रमण के दूसरे दिन इतना लोड...
डॉ. यॉन्कर बताती हैं हर उम्र के बच्चों में वायरस का वायरल लोड बहुत अधिक है। खासतौर पर संक्रमण के दूसरे दिन, इसकी तो उम्मीद भी नहीं थी। नाक में ही नहीं अस्पताल में भर्ती 162 वयस्कों की तुलना में बच्चों की श्वास नलिका में भी वायरस की मात्रा अधिक पाई गई जो 60 फीसदी के करीब था।
परिवार के बुजुर्गों के लिए बच्चे खतरा
बच्चे परिवार के दूसरे सदस्यों खासतौर पर बुजुर्गों को संक्रमित कर सकते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी हो सकते हैं जिन्हें संक्रमण का कोई लक्षण ही न हो। शोध में पता चला है कि अस्पताल में भर्ती संक्रमित वयस्क मरीजों की तुलना में जो बच्चे संक्रमण से अनजान होकर घूम रहे थे उनमें वायरस था।
स्कूल खोलने से खतरा संभव
शोधकर्ताओं के अनुसार, स्पष्ट है कि महामारी के बीच स्कूल खोले गए तो हालात बिगड़ सकते हैं। प्रो. एलिसो फसानो का कहना है कि बच्चे संक्रमण से बच नहीं सकते हैं। बिना किसी योजना के स्कूल खोलना खतरनाक हो सकता है।