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अध्ययन: नींद और दिल की बीमारियों का है कनेक्शन, रात 10 से 11 बजे के बीच सोने से खतरा होता है कम

Wed, 02 Mar 2022 03:53 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी में हुए शोध में हार्ट अटैक के खतरे से बचने के लिए सलाह दी गई है। शोध में पाया गया कि दिल संबंधी बीमारियों का कनेक्शन इंसान की नींद और सोने के समय से होता है। दावा किया गया है कि अगर आधी रात या काफी देर से लोग सोते हैं तो हार्ट डैमेज होने की समस्या आ सकती है। ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि रात में समय पर सोने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने एक स्टैंडर्ड टाइम भी बताया। इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 10 से 11 बजे के बीच में सोने की सलाह दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समय 'गोल्डन आवर' होता है।

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नींद का हृदय रोग से हैं नाता 

दरअसल, हृदय संबंधी बीमारियों का व्यक्ति के सोने के समय से कनेक्शन वाला शोद इंग्लैंड की एक्सेटर यूनिवर्सिटी में किया गया है। हालिया रिसर्च में जो रिपोर्ट सामने आई उसमें दावा किया गया कि जो लोग देर से सोते हैं वो सुबह देर से उठते हैं। ऐसे में उनकी बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब होती है। इसका सीधा असर मनुष्य के हृदय पर पड़ता है। खासकर देर से जो महिलाएं सोती हैं उनके हार्ट पर बुरा असर पड़ता है।

रात 10 से 11 बजे की बीच सोने वालों को हार्ट अटैक का खतरा कम

शोधकर्ताओं ने सलाह दी कि रात में जल्दी सोकर व्यक्ति दिल की बीमारियों का खतरा कम कर सकता है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने रिसर्च के परिणाम के आधार पर सोने का सही समय भी बताया ताकि हार्ट की बीमारियों के खतरे से बचा जा सके। शोध परिणाम में पाया गया कि जो मरीज हर रात 10 से 11 बजे के बीच सो जाते हैं उनमें दिल संबंधी बीमारियों के मामले सबसे कम हैं। ऐसे में रात 10 से 11 बजे की बीच में सोने से हृदय रोग से बचा जा सकता है। वहीं शोध के मुताबिक आधी रात के बाद सोने वाले लोगों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा 25 फीसदी तक ज्यादा होता है।
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ये रिसर्च 43 से 74 साल की उम्र के 88 हजार ब्रिटिश वयस्कों पर किया गया है। स्टडी के लिए शोधकर्ताओं में लोगों के हाथ में एक ट्रैकर पहनाया था। जिसके माध्यम से उनके सोने और जागने के समय को मॉनिटर किया गया। वहीं उनकी जीवन शैली के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। इन लोगों के 5 साल तक के हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर का मेडिकल रिकॉर्ड रखा गया और इसकी तुलना की गई।

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स्रोत और संदर्भ

https://www.exeter.ac.uk/research/

https://www.nhs.uk/live-well/sleep-and-tiredness/how-to-get-to-sleep/

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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