एसएमए टाइप-2 के इलाज के लिए आई मदद
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एसओएल ने इलाज के लिए की पहल
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) ने अपने एक शिक्षक की बेटी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाया है। बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। उसके इलाज में बड़ी रकम खर्च होने के कारण परिवार को आर्थिक मदद की जरूरत पड़ी।
- एसओएल ने बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहायता देने के मामले पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल हैं।
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के निदेशक प्रो पायल मागो ने कहा कि हमने शिक्षकों के आग्रह पर एक मेडिकल बोर्ड बनाया है। बच्ची के इलाज के लिए पिछले कुछ महीनों में परिवार, रिश्तेदारों और सहयोगियों की मदद से क्राउडफंडिंग के जरिए करीब एक करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।
इस दुर्लभ बीमारी में करीब 16 करोड़ का खर्च आएगा, यह रकम इलाज पर आने वाले अनुमानित कुल खर्च का केवल 6.25 प्रतिशत है। ऐसे में परिवार को अभी और आर्थिक सहायता की जरूरत है। इस तरह की बीमारियां फिलहाल केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना के पैनल में शामिल नहीं हैं।
मांसपेशियों को प्रभावित करने वाली बीमारी
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एसएमए टाइप-2 क्या बीमारी है?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करती है। इससे मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और उनका आकार भी घट जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर बच्चे की उम्र 6 से 18 महीने के बीच दिखाई देते हैं।
इस बीमारी में बच्चा सहारे के बिना बैठ तो सकता है लेकिन आमतौर पर अपने दम पर खड़ा या चल नहीं पाता। समय पर इलाज और उचित देखभाल से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
- मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एसएमए टाइप-2 का मुख्य कारण एसएमएन जीन में बदलाव या उसकी कार्यक्षमता में कमी है।
- यह जीन शरीर में सर्वाइवल मोटर न्यूरॉन (एसएमए) नामक प्रोटीन बनाने के निर्देश देता है, जो मोटर न्यूरॉन्स के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है।
- इस प्रोटीन की कमी से मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं और मांसपेशियों तक गति नियंत्रित करने वाले संकेत ठीक से नहीं पहुंच पाते।
- यह बीमारी आमतौर पर तब होती है, जब बच्चे माता-पिता दोनों से प्रभावित जीन बच्चे में आ जाते हैं।
एसएमए टाइप-2 के कारण होने वाली दिक्कतें
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एसएमए टाइप-2 की क्या पहचान है?
एसएमए टाइप-2 से प्रभावित बच्चों में मांसपेशियों की कमजोरी और शारीरिक रूप से कामकाज करने में परेशानी होती है। ऐसे बच्चों को बिना सहारे बैठने, करवट बदलने या हाथ-पैर हिलाने में कठिनाई हो सकती है। कई बच्चों में उंगलियों में हल्का कंपन, मांसपेशियों में कसाव की कमी और घुटनों से संबंधित दिक्कतें भी हो सकती हैं।
कुछ बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ, जो शारीरिक गतिविधियां वह पहले कर लेते थे उनकी क्षमता भी घट जाती है। हालांकि, इस बीमारी में आमतौर पर बच्चों का दिमाग और समझने की क्षमता प्रभावित नहीं होती।
- रीढ़ की हड्डी में असामान्य टेढ़ापन (स्कोलियोसिस), जोड़ों में अकड़न और शरीर की गतिविधियों में दिक्कतें आ सकती हैं।
- कुछ बच्चों में सांस लेने वाली मांसपेशियां कमजोर होने से सांस लेने, खांसी के जरिए बलगम निकालने और संक्रमण से लड़ने में भी परेशानी होती है।
- मांसपेशियों की कमजोरी के कारण निगलने, भोजन का सांस की नली में जाने जैसी दिक्कतें भी होती रहती है।
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स्रोत:
Spinal Muscular Atrophy
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