इन दिनों फ़िल्मों में पुराने ज़माने के दिलीप कुमार, देव आनंद, राजकपूर, जितेंद्र, राजेंद्र कुमार जैसे हीरो कम ही दिखते है और ना ही उनकी मदद करने के लिए कोई ताक़तवर साइड हीरो होता है। आमिर खान, सलमान खान और शाहरूख खान जैसे आज के सितारे चॉकलेटी इमेज से बहुत आगे निकल चुके है और उनके सिक्स पैक एब चर्चा का केंद्र अधिक रहते है।
गजनी, बॉडीगार्ड और ओम शांति ओम में यह सब अपने डोले-शोले दिखा चुके है। अब इसे नए ज़माने का चलन कहिए या स्वास्थय के प्रति बढती जागरूकता कि आज बहुत सारे युवा वास्तविक ज़िदंगी में कुछ-कुछ ऐसा ही दिखने चाहते हैं।
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डोपिंग में क्यों बदनाम है भारत?
जहाँ देखो यहाँ-वहाँ गली-मोहल्ले, व्यस्त सड़को के किनारे, मॉल,गॉव-कस्बों, शहरों में हैल्थ सेंटर से लेकर जिमनेज़ियम नज़र आते हैं। वहाँ युवा लड़के-लड़कियों के अलावा अधेड़ उम्र के लोग भी ट्रेड मिल पर दौड़ते दिख जाएंगे।
जो मज़बूत लोहे का वेट नहीं उठा सकते, वो आराम से खड़े हो कर फिर फ़ोम के आरामदायक गद्दे जैसा अहसास देती मशीनों पर लेटकर भी वेट एक्सरसाइज़ कर सकते हैं।
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आम तौर पर जिमनेज़ियम एक ट्रेनर होता है जो बताता है कि किस तरह की कसरत की जाए, कैसे जल्दी से जल्दी आजकल के हीरो जैसा बना जाए।
बस इस तरह की जगहों पर पैसा ज़रा ज़्यादा लगता है। जिनके पास अधिक पैसा नहीं है वो आज भी किसी पुराने ज़माने के वेटलिफ्टिंग सेंटर में जो सकते है, लेकिन वहाँ पसीना अधिक बहाना पड़ेगा।
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ज़रा ध्यान से लें सप्लीमेंट
ऐसा नहीं है कि जिमनेज़ियम में सिर्फ कसरत करने से सिक्स पैक एब बन जाएंगे। आज कल कई जगहों पर सिक्स पैक एब बनाने के लिए सप्लीमेंट लेने की सलाह भी दी जाती है। ये सप्लीमेंट छोटे-बड़े पैकेट से लेकर पाँच-दस किलो के डिब्बों में तरह-तरह के नामों से आते है। पर ये सप्लीमेंट नुकसानदायक हो सकते हैं चाहे लो किसी की सलाह से लिए गए हों।
अमरीका में स्पोर्टस मैडिसीन में डब्लयूएचओ( विश्व स्वास्थय संस्था) से फ़ैलोशिप कर चुके डॉक्टर जवाहर लाल जैन कहते हैं, "न्यूट्रिशन सपलीमैंट फिज़िशियन की निगरानी में ही लिया जाना चाहिए। न्यूट्रिशन सपलीमैंट लेना बुरा नहीं है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि न्यूट्रिशन सपलीमैंट की इंडस्ट्री नियामक नहीं है। बहुत सारी आयुर्वेदिक दवाइयां हैं लेकिन बिना सलाह से या फिर अपने मन से सपलीमैंट लेने से नुकसान भी हो सकता है।"
डॉक्टर जवाहर लाल जैन बताते हैं, "पिछले दिनों जितना भी शोध हुआ उसके आधार पर सरकार ने भारतीय खेल प्राधिकरण से भी कहा है कि वह अपने क्षेत्रिय ट्रेनिंग सैंटर में न्यूट्रीशन सप्लीमेंट की जगह सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम, किशमिश दे।"
जैन चेतावनी देते हैं कि अगर सप्लीमेंट में क्षमता बढाने वाली दवाइंया मिली हों तो किसी भी खिलाड़ी का खेल जीवन क्लिक करें डोप के आरोप में समाप्त हो सकता है। जैम कहते है "सप्लीमेंट के डिब्बो में कई बार स्टेरॉयड्स मिले हुए होते हैं। एथलीट ये बात समझते हैं कि एक चम्मच खाने से प्रदर्शन 10 गुना और 6 चम्मच खाने से 60 गुना बढ़ जाएगा।"
डाक्टर जवाहर लाल कहते हैं, "विदेश से आने वाले डिब्बों की जाँच से पता चलता है कि कई डिब्बों में नैंड्रोलोन नामक सॉल्ट मिला हुआ था। इसके अधिक सेवन से ख़ासकर पुरूषों के स्तन बहुत बढ जाते है, आवाज़ भारी हो जाती है, गुस्सा अधिक आता है, चिड़चिड़ापन बढ जाता है, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है, लीवर कैंसर हो सकता है। महिलाओं के चेहरे पर बाल आ जाते है। कुछ एथलीट गंजे हो जाते है। बांझपन हो जाता है और कुछ को अन्य तरह की गंभीर बीमारिया घेर लेती है।"
मिस्टर इंडिया की सलाह
ऐसा नहीं है कि सब लोग दवाइयों के सहारे ही सिक्स पैक एब बनाते हों। अगर दिनेश सिंह ओसवाल की बात की जाए तो वह कई बार बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के विजेता रह चुके है। वह कई बार मिस्टर इंडिया भी रह चुके है।
उनका कहना है, "इसके लिए बड़ी मेहनत की ज़रूरत है। नियमित व्यायाम, अच्छी डाइट, न्यूट्रिशन भी ज़रूरी है। क्वालिफाइड ट्रेनर का होना आवश्यक है। अब तो कोचों के लिए सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाए जा रहे हैं। अगर आप जिम में जाएँ तो सुनिश्चित करें कि डाइटिशियन,फिज़ियो और ट्रेनर प्रशिक्षित हों।"
तो शरीर की देखभाल करना या फिर कसरत करना बुरा नही है पर ज़रा सभंलकर।