हॉर्स शू केकड़े
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दरअसल, हॉर्सशू क्रैब के नीले खून के इस्तेमाल से वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि कहीं दवाइयों में कोई खतरनाक बैक्टीरिया या वायरस तो नहीं है। असल में जो दवाएं विकसित की जाती हैं, उनमें कई बार एंडोटॉक्सिन पाया जाता है, जो वायरस की ऊपरी झिल्ली पर मौजूद रहता है। अगर ऐसे ही बिना जांचे उस दवा को किसी मरीज को दे दिया जाए तो उसके इस्तेमाल से उसे जानलेवा बुखार भी हो सकता है। इसीलिए दवाओं को जांचने में हॉर्सशू क्रैब के खून का उपयोग किया जाता है, क्योंकि खून में पाया जाने वाला एक अर्क एंडोटॉक्सिन मिलने पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है, जिससे वैज्ञानिकों को यह पता चल जाता है कि वो दवा इंसानों को देने लायक नहीं है।