बिना स्कूली शिक्षा वाली 80 प्रतिशत महिलाएं सेनेटरी पैड का उपयोग करती हैं
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पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुतरेजा ने कहा कि एनएफएचएस-5 शिक्षा, धन और मासिक धर्म से बचाव के स्वच्छ तरीकों के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बिना स्कूली शिक्षा वाली 80 प्रतिशत महिलाएं सेनेटरी पैड का उपयोग करती हैं, जबकि 12 पास या अधिक शिक्षा वाली केवल 35.2 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी पैड का उपयोग करती हैं। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म की सुरक्षा के लिए कपड़े का उपयोग शहरी क्षेत्रों की 31.5 प्रतिशत महिलाओं की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में अधिक है, जिनका आंकड़ा 57.2 प्रतिशत है।
पीरियड्स के बारे में न बोल पाना इसकी वजह
मुत्रेजा के मुताबिक, सबसे कम वेल्थ क्विंटल की महिलाओं में सबसे ज्यादा वेल्थ क्विंटल की महिलाओं की तुलना में कपड़े का उपयोग करने की संभावना लगभग 3.3 गुना अधिक है। इस प्रकार, सामाजिक पृष्ठभूमि अक्सर उचित मासिक धर्म स्वच्छता तक पहुंच निर्धारित करती है। पीरियड्स के बारे में बोलने पर प्रतिबंध या वर्जित होना महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन तक पहुंचने से हतोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म की स्वच्छता में सुधार के लिए लड़कियों की शिक्षा में निवेश की आवश्यकता है।
पीएमबीजेपी में 1 रुपये प्रति पैड
सामाजिक कार्यकर्ता और सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा कि मासिक धर्म के दो पहलुओं को समझना महत्वपूर्ण है - एक मासिक धर्म से जुड़ी शर्म और दूसरा यह कि लड़कियां इसे किसी के साथ साझा नहीं करती हैं। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत देश भर के केंद्रों में सैनिटरी नैपकिन कम से कम 1 रुपये प्रति पैड की कीमत पर उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नैपकिन के लिए आपको पैसो की जरूरत तो तब भी है। यानी अगर लड़कियों को 12 नैपकिन की जरूरत है तो उन्हें अपने माता पिता से 12 रुपये मांगने की जरूरत होगी। किस काम के लिए यह बताने में वह कतराएंगी।
पैड के लिए पैसे मांगने में कतराते हैं लोग
उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है कि माता-पिता सोचें कि यह एक बेकार खर्च है। इसलिए माता-पिता को भी लड़कियों के स्वास्थ्य के लिए परामर्श देने की आवश्यकता है। सरकार जो नैपकिन एक रुपये में उपलब्ध करा रही है, उसे संवेदीकरण के साथ हाथ से हाथ समुदायों में देने की जरूरत है। 2019-21 के बीच एनएफएचएस-5 देश के 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों के 707 जिलों में आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 6.37 लाख घरों को सैंपल के लिए लिया गया। अलग-अलग अनुमान प्राप्त करने के लिए 7,24,115 महिलाओं और 1,01,839 पुरुषों को शामिल किया गया है। ध्यान दें कि राष्ट्रीय रिपोर्ट सामाजिक-आर्थिक और अन्य पृष्ठभूमि विशेषताओं द्वारा डेटा भी प्रदान करती है, जो नीति निर्माण और प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए उपयोगी है।
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नोट: यह लेख राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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