कोरोना के वैरिएंट्स और इसका खतरा
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डब्ल्यूएचओ भी हो गया अलर्ट
कोरोना के दोनों सब-वैरिएंट्स NB.1.8.1 और LF.7 के मामले भारत सहित कई देशों में काफी तेजी से बढ़े हैं, भारतीय आबादी में भी इसके कारण संक्रमण में तेजी से उछाल आया है। बढ़ते जोखिमों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अब NB.1.8.1 को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग के रूप में वर्गीकृत कर दिया है, अब तक इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में रखा गया था।
- वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग का मतलब है कि अब वायरस के इस रूप को लेकर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देने और निगरानी की आवश्यकता है।
- वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के दौरान वायरस में हुए परिवर्तन और इसके प्रभाव को समझने की कोशिश की जाती है, इस वर्गीकरण का मतलब होता है कि वैरिएंट ज्यादा चिंताजनक नहीं है।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले
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इस वैरिएंट के बारे में जानिए
येल मेडिसिन के अनुसार, JN.1 स्ट्रेन (अनौपचारिक रूप से 'पिरोला') के मामले पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा देखे जा रहे थे। इसमें म्यूटेशन के बाद दो नए सब-वैरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 सामने आए थे। इसके स्पाइक प्रोटीन में कुछ म्यूटेशन (जैसे ए435एस, वी445एच और टी478आई) देखे गए हैं जो इसे अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामकता और शरीर में बनी प्रतिरक्षा से बचने में मदद कर रहे हैं। यही कारण है कि इससे वो लोग भी संक्रमित हो रहे हैं जो पहले से वैक्सीनेशन की डोज पूरी कर चुके हैं या बूस्टर शॉट भी ले चुके हैं।
चूंकि समय के साथ शरीर में बनी इम्युनिटी भी कमजोर होती जाती है, इसलिए ये वायरस प्रभावी रूप से फैल रहा है।
कोरोना संक्रमितों को क्या दिक्कतें हो रही हैं?
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संक्रमितों के क्या दिक्कत हो रही है?
देश में संक्रमितों को क्या दिक्कतें हो रही हैं, उनमें किस तरह के लक्षण देखे जा रहे हैं, क्या फिर से लोगों को सांस की दिक्कतें हो रही हैं और ऑक्सीजन की जरूरत होगी? इस बारे में समझने के लिए हमने पुणे स्थित एक अस्पताल में क्रिटिकल केयर के डॉक्टर उपेंद्र सिंह से बातचीत की।
डॉक्टर बताते हैं, देश में फिलहाल 1000 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। ज्यादातर लोग घर पर ही ठीक हो रहे हैं, बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी हैं जिनको पता भी नहीं है कि वह संक्रमित हैं। हालांकि कोमोरबिडिटी या कमजोर इम्युनिटी वालों को कुछ स्थितियों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है। फिलहाल ऐसे रोगियों में कोई अलग या गंभीर लक्षण नहीं देखे गए हैं।
NB.1.8.1 से संक्रमित लोगों में भी अन्य ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट के समान लक्षण देखे जा रहे हैं। इनमें लगातार खांसी, गले में खराश, थकान-सिरदर्द, भूख न लगने, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं देखी जा रही हैं। सांस की समस्या या अन्य गंभीर दिक्कतें नहीं हो रही हैं, ऑक्सीजन की कमी के भी मामले फिलहाल नहीं हैं। वैरिएंट संक्रामक जरूर है पर खतरनाक या जानलेवा नहीं है।
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स्रोत और संदर्भ
Covid-19 facilities in States & Union Territories
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