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Mumps Outbreak: दिल्ली-एनसीआर में बढ़े मम्प्स के मामले, डॉक्टरों ने बताया कैसे रहें सुरक्षित

Fri, 03 May 2024 06:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ हफ्तों में अचानक से संक्रामक रोग के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। डॉक्टर्स ने बताया बच्चे इसके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
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मम्प्स का संक्रमण - फोटो : istock
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली में इन दिनों वायरल संक्रमण मम्प्स के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ हफ्तों में अचानक से संक्रामक रोग के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। डॉक्टर्स ने बताया बच्चे इसके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। मम्प्स अति संक्रामक वायरल संक्रमण है ऐसे में इसके प्रसार का खतरा काफी अधिक होता है।

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मम्प्स का संक्रमण लार बनाने वाली पेरोटिड ग्रंथियों को लक्षित करता है जिसके कारण चेहरे के एक तरफ सूजन और दर्द होने की समस्या हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों को इस संक्रामक रोग के खतरे से बचाना आवश्यक है। कुछ स्थितियों में मम्प्स के गंभीर रूप लेने का भी खतरा हो सकता है।

मार्च-अप्रैल में भी बढ़े थे मामले

यहां जानना जरूरी है कि मम्प्स का संक्रमण सिर्फ बच्चों को ही नहीं वयस्कों को भी शिकार बना सकता है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर से पहले पिछले महीने ही तमिलनाडु-केरल से लेकर राजस्थान तक में भी इस संक्रामक रोग के केस बढ़ते हुए देखे गए थे। पैरामाइक्सोवायरस नामक वायरस के समूह के कारण होने वाले इस संक्रामक रोग में पैरोटिड ग्रंथियों में गंभीर और दर्दनाक सूजन हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि मम्प्स के गंभीर संक्रमण की स्थिति में रोगियों के सुनने की क्षमता भी जा सकती है।

डॉक्टर बताते हैं, मम्प्स रोग सबसे अधिक दो से 12 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रभावित करता है, जिन लोगों को मीसल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर) का टीका नहीं लगा है ऐसे लोगों में संक्रमण होने और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा भी अधिक हो सकता है। समय रहते इसके लक्षणों की पहचान और उपचार किया जाना आवश्यक हो जाता है। संक्रमण की शुरुआती स्थिति में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और भूख की कमी जैसी समस्या हो सकती है। संक्रमण बढ़ने के साथ इसके लक्षणों को बढ़ने का खतरा रहता है।

 

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राजधानी दिल्ली में बढ़े मम्प्स के मामले - फोटो : istock
मम्प्स से बचाव के लिए क्या है डॉक्टर्स की सलाह

मम्प्स रोग के लिए पैरामाइक्सोवायरस को प्रमुख कारण माना जाता है। ये वायरस व्यक्ति के लार के सीधे संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के नाक, मुंह या गले से निकलने वाली श्वसन बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इस संक्रामक रोग से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाकर रखना आवश्यक माना जाता है।

जिन लोगों को प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या फिर जिन लोगों को एमएमआर वैक्सीन नहीं लगी है उनमें इस रोग के विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। यदि आपके बच्चे को मम्प्स के संक्रमण है तो इसके प्रसार को रोकने के लिए उन्हें स्कूल जाने से रोके।

मम्प्स का हो जाए संक्रमण तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मम्प्स के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इसके लक्षणों के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं देते हैं। आम तौर पर कुछ हफ्तों के भीतर ये संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है। इस संक्रामक रोग की स्थिति में तरल पदार्थों के सेवन, गुनगुने नमक पानी से गरारे करने, अम्लीय खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। 

वायरल संक्रमण के खतरे से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें और अगर आपमें लक्षण दिख रहे हैं तो समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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