राजधानी दिल्ली में बढ़े मम्प्स के मामले
- फोटो : istock
मम्प्स से बचाव के लिए क्या है डॉक्टर्स की सलाह
मम्प्स रोग के लिए पैरामाइक्सोवायरस को प्रमुख कारण माना जाता है। ये वायरस व्यक्ति के लार के सीधे संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के नाक, मुंह या गले से निकलने वाली श्वसन बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इस संक्रामक रोग से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाकर रखना आवश्यक माना जाता है।
जिन लोगों को प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या फिर जिन लोगों को एमएमआर वैक्सीन नहीं लगी है उनमें इस रोग के विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। यदि आपके बच्चे को मम्प्स के संक्रमण है तो इसके प्रसार को रोकने के लिए उन्हें स्कूल जाने से रोके।
मम्प्स का हो जाए संक्रमण तो क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मम्प्स के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इसके लक्षणों के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं देते हैं। आम तौर पर कुछ हफ्तों के भीतर ये संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है। इस संक्रामक रोग की स्थिति में तरल पदार्थों के सेवन, गुनगुने नमक पानी से गरारे करने, अम्लीय खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है।
वायरल संक्रमण के खतरे से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें और अगर आपमें लक्षण दिख रहे हैं तो समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।