प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा बिहार भी उन राज्यों में शामिल हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस से काफी मामले इलाज के लिए रिपोर्ट होते हैं। लेकिन बिहार के प्रमुख टीबी अधिकारी डॉक्टर केएन सहाय के अनुसार, 'सारा फोकस कोविड-19 डाययग्नोसिस में शिफ्ट करना पड़ गया।'
उन्होंने कहा, 'स्टाफ की पहले भी कमी थी। पिछले महीनों में उन्हें कोविड केयर सेंटर और होम-टू-होम सैम्पल कलेक्शन वगैरह में शिफ्ट कर दिए गए। ये तो मैंने सरकारी सेंटर्स की बात बताई है, प्राइवेट में भी सारे टीबी क्लीनिक लगभग बंद थे। इन सारी चीजों ने मिलकर हमारी केस नोटिफिकेशन में काफी गिरावट कर दी, 30 फीसदी से भी ज्यादा की।'
पंकज भवनानी की तरह कोविड-19 महामारी के दौरान बहुत से ऐसे मरीज थे, जिनको दवाओं-सुविधाओं में बहुत दिक्कत हुई, अस्पतालों तक पहुंच नहीं सके। बहुत से ऐसे भी थे जो मिसिंग बताए जा रहे हैं यानी जिनका इलाज बीच में छूट गया।