जीरो फिगर की चाह में अगर अंतर्राष्ट्रीय मॉडल्स 'टिशु पेपर' खाकर अपनी भूख मारती हैं तो इसकी वजह मॉडलिंग एजेंसियों का रवैया भी है जो जीरो फिगर मॉडल्स की तलाश में बीमार और एनेमिक लड़कियों को खोजने अस्पताल तक पहुंचने से बाज नहीं आतीं।
जी हां, यह घटना है स्वीडन की जहां स्टॉकहोम सेंटर फॉर ईटिंग डिसॉर्डर के कर्मचारियों ने खुलासा किया कि मॉडलिंग एजेंसी यहां उन लड़कियों को नौकरी देने की तलाश में आती हैं जो एनिमिक या डाइट से संबंधित बीमारियों से ग्रसित होती हैं।
'हफिंगटनपोस्ट' ने स्वीडन के स्थानी अखबार के हवाले से खबर प्रकाशित की, जिसमें इस अस्पताल के कर्मचारियों ने इस बारे में खुलासा किया। स्वीडन के स्थानीय समाचारपत्र 'मेट्रो' को इस अस्पताल की निदेशक अन्ना मारिया एफ सैंडबर्ग ने बताया, 'हमारे लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि मॉडल एजेंसियों के इस गैरजिम्मेदार रवैये की वजह से उन लड़कियों को गलत संदेश मिलेगा जिनका यहां उपचार होता है।'
हालांकि ऐसी घटनाएं काफी समय से हो रही हैं लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा इस बारे में खुलासा करने के बाद ये अधिक लाइमलाइट में आईं। उन्होंने कई बड़ी मॉडलिंग एजेंसियों का खुलासा भी किया जो इस तरह काम करती हैं।
दूसरी ओर, स्टॉकहोम के एलीट मॉडल मैनेजमेंट ग्रुप के निदेशक फ्रेडो कजेमी ने बताया, 'इन एजेंसियों के नाम अभी गोपनीय रखे गए हैं लेकिन यह वाकई बहुंत चौंकाने वाली सच्चाई है।'
मॉडलिंग एजेंसियों के जीरो फिगर के मोह और मॉडल्स की सेहत को लेकर पहले भी कई बार सवाल खड़े हो चुके हैं। कुछ समय पहले है वोग की पूर्व संपादक ने मॉडल्स पर जीरो फिगर के दबाव, डाइटिंग और कमजोरी के लेकर कई खुलासे किए थे।