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कामयाबी: लक्षण दिखने से पहले ही लिवर रोगों का पता लगा लेगा ये ब्लड टेस्ट, लाखों लोगों की बचेगी जान

Thu, 02 Oct 2025 03:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • शोधकर्ताओं की टीम ने  एक ऐसा रक्त परीक्षण विकसित किया है जो लक्षण प्रकट होने से कई साल पहले ही लिवर की बीमारी का पता लगा सकता है।
  • दावा किया जा रहा है कि इस टेस्ट की मदद से सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियों का निदान पहले से कहीं ज्यादा जल्दी हो सकेगा।
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ब्लड टेस्ट से लिवर रोगों का चलेगा पता - फोटो : Adobe Stock Images
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विस्तार
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CORE Model For Liver: लिवर की बीमारी मौजूदा समय में तेजी से उभरती स्वास्थ्य चिंता है, जिससे सभी उम्र के लोग प्रभावित देखे जा रहे हैं। शोध बताते हैं कि हर साल लिवर संबंधी रोगों के कारण बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं और इनमें से कई मामलों में समय पर निदान न हो पाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। भारतीय आबादी में भी लिवर रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर जीवन की गुणवत्ता और आयु पर पड़ता है।

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लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो पाचन से लेकर विषैले पदार्थों को बाहर निकालने तक कई अहम काम करता है। लेकिन खराब खानपान, शराब, मोटापा, हेपेटाइटिस जैसे वायरल संक्रमण और शारीरिक निष्क्रियता इसके कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं। खासतौर पर शहरी इलाकों में जंक फूड्स और अस्वस्थ जीवनशैली ने लिवर रोगों को तेजी से बढ़ाया है। बच्चों और किशोरों में फैटी लिवर जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं, जो पहले सिर्फ बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं।

डॉक्टर कहते हैं, सबसे बड़ी चुनौती है कि लिवर रोगों के अक्सर शुरुआती चरणों में लक्षण नहीं दिखाते। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक यह गंभीर रूप ले चुकी होती है। इस चिंता को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने एक आशाजनक खोज की है जिससे लक्षण शुरू होने से वर्षों पहले गंभीर लिवर रोगों के खतरे का पता लगाया जा सकता है।

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नए ब्लड टेस्ट की खोज - फोटो : Adobe Stock Images
ब्लड टेस्ट से चलेगा लिवर रोगों का पता

स्वीडन स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं की टीम ने एक ऐसा रक्त परीक्षण विकसित किया है जो लक्षण प्रकट होने से कई साल पहले ही लिवर की बीमारी का पता लगा सकता है। दावा किया जा रहा है कि इस टेस्ट की मदद से सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियों का निदान पहले से कहीं ज्यादा जल्दी हो सकेगा।

इसे सिरोसिस आउटकम रिस्क एस्टीमेटर (कोर) मॉडल कहा गया है। 4.80 लाख से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन के बेहतर परिणाम देखे गए हैं जिसने वैज्ञानिकों के लिए उम्मीदें बढ़ा दी हैं।


ये भी पढ़िए- (लिवर रोगों की 'महामारी' का अलर्ट, डॉक्टरों ने बताई वो आदत जिससे बढ़ रहा है खतरा)

लिवर रोगों की बढ़ती समस्याएं - फोटो : adobe stock images
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन की रिपोर्ट बीएमजे जर्नल में प्रकाशित की गई है। स्वीडिश वैज्ञानिकों की टीम ने सन् 1985 और 1996 के बीच स्टॉकहोम में 480,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन प्रतिभागियों पर तीन दशकों तक नजर रखने के बाद पाया गया कि 1.5% लोगों में गंभीर यकृत रोग विकसित हुए या उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ी। इस आंकड़ों का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने एक पूर्वानुमान मॉडल तैयार किया जिसने 88% मामलों में गंभीर यकृत रोग के जोखिम की सही पहचान की।

यह परीक्षण फिनलैंड और यूके की आबादी पर भी किया गया, जहां भी सटीक परिणाम प्राप्त हुए। 

खून की जांच से चलेगा लिवर रोगों का पता - फोटो : Adobe Stock Images
कैसे काम करता है ये टेस्ट?

इस टेस्ट के लिए वैज्ञानिकों ने एक मॉडल बनाया जो तीन प्रमुख लिवर एंजाइमों- एलानिन एमिनोट्रांस्फरेज, एस्पार्टेट एमिनोट्रांस्फरेज और गामा-ग्लूटामाइल ट्रांस्फरेज के स्तर को मापने वाले परीक्षणों के परिणामों का विश्लेषण करता है, जिनका परीक्षण आमतौर पर नियमित जांच के दौरान किया जाता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इन लिवर फंक्शन परीक्षण परिणामों को रोगी की उम्र और लिंग के साथ कोर मॉडल में शामिल करके अगले 10 वर्षों में गंभीर लिवर रोग के जोखिम का निर्धारण कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस परीक्षण की प्रभावशीलता को और बेहतर बनाने के लिए उच्च जोखिम वाले समूहों जैसे टाइप-2 डायबिटीज और मोटापा से ग्रस्त लोगों पर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
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लिवर की सेहत को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
लाखों लोगों का गंभीर रोगों से होगा बचाव

प्रमुख शोधकर्ता और ओबेसिटी मेडिसिन डॉक्टर जेनिफर ब्राउन कहती हैं, नया कोर मॉडल लिवर सिरोसिस के 10 साल के जोखिमों का अनुमान लगाने में एक रोमांचक और बेहद जरूरी प्रगति का आशा जगाता है। यह मॉडल मरीज के जोखिमों का आकलन करने के लिए आसानी से उपलब्ध लिवर लैब परीक्षणों का उपयोग करता है।

फिलहाल, सामान्य आबादी में लिवर सिरोसिस की जाच करने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है। अगर इसे व्यापक रूप से कामयाबी मिलती है कि हर साल हम लाखों लोगों को गंभीर रोगों से बचा सकते हैं साथ ही इसके कारण होने वाली मौतों के खतरे को कभी कम कर सकते हैं।



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स्रोत
Use of new CORE risk score to predict 10 year risk of liver cirrhosis in general population: population based cohort study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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