बढ़ती गर्मी को लेकर अलर्ट
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125 साल में सबसे गर्म थी इस बार की फरवरी
इससे पहले यूरोपियन कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि पिछला महीना यानी फरवरी 125 साल में अब तक का तीसरा सबसे गर्म फरवरी का महीना था। इस दौरान सतह के पास तापमान 1850 से 1900 की तुलना में 1.59 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञ कहते हैं, जलवायु परिवर्तन की वजह से वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है, इससे गंभीर बीमारियों के बढ़ने का भी खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट करते हुए कहा है कि अभी से ही देश के कई हिस्सों में जिस तरह की गर्मी महसूस की जा रही है, ये मई-जून में रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
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मार्च के अंत तक पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
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अप्रैल से ही तपने लगेगी दिल्ली?
राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से तापमान 30-31 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक मार्च के अंत तक पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। अप्रैल के अंत तक तापमान 45 तक पहुंचने की आशंका है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस तरह का तापमान सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है। विशेषतौर पर बच्चों-बुजुर्गों और गर्भवती की सेहत पर इसका कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। इन लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
बुजुर्गों की सेहत पर गर्मी का असर
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
बढ़ती गर्मी, इसके दुष्प्रभाव और बचाव के उपायों के बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने राजधानी दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरदीप निकुंज से बातचीत की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई रिपोर्ट्स इस बार भयंकर गर्मी को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। अप्रैल-मई में हीटवेव चलने की आशंका जताई जा रही है जिसको लेकर सतर्कता जरूरी है। बच्चों-बुजुर्गों में गर्मी सहने की क्षमता कम होती है, जिससे उन्हें हीट स्ट्रोक, हीट क्रैम्प्स, सनबर्न जैसे समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। अधिक तापमान का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर होता है।
बढ़ते तापमान और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचे रहने के लिए 40 डिग्री तापमान बाहर जाने से बचना चाहिए। गर्मी से बचाव के लिए शरीर के कुछ हिस्सों को ठंडा बनाए रखना ज्यादा असरकारक होता है। खासकर कलाई, गर्दन और तलवों को ठंडा रखने से शरीर का अंदरूनी तापमान नियंत्रित रखा जा सकता है।
कलाइयों और चेहरे को दिन में चार-पांच बार ठंडे पानी से धीते रहने से शरीर के तापमान को काफी कंट्रोल में रखा जा सकता है।
गर्मी से बचाव के उपाय जरूरी
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गर्मी के साइड-इफेक्ट्स को कम करने के लिए और क्या करें
डॉक्टर बताते हैं, अधिक तापमान के कारण होने वाली दिक्कतों से बचे रहने के लिए अभी से कुछ उपाय शुरू कर दें।
- शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है, इसके लिए खूब पानी पीते रहें। पानी पीने के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस भी बनाए रखें। ओआरएस या नारियल पानी भी पीते रहें।
- नींबू पानी पीते रहें और पानी से भरपूर फलों का सेवन करना भी जरूरी है। हर 2-3 घंटे में तरबूज, ककड़ी, छाछ-दही लेते रहें।
- बुजुर्गों को एक बार में पेटभर खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लेना चाहिए।
- जहां आराम करते हैं वहां का तापमान अधिकतम 27° से 28 डिग्री रखें।
- अधिक पसीने से त्वचा में जलन होती है। शरीर में थकावट के कारण चक्कर आना, कमजोरी होना या मतली हो सकती है, इसलिए 40 से अधिक तापमान में दिन के समय घर से बाहर न जाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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