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तनाव दूर करना है तो ये तीन तरकीब अपनाएं, शर्तीय सफलता मिलेगी

Sun, 07 Jan 2018 10:27 AM IST
नंद राम
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पहले विचार पर ध्यान देना। फिर सांस प्रक्रिया को जानना। और आखिर में अपनी भावनाओं को समझना। तनाव मुक्ति के लिए ध्यान की ये तकनीक बहुत कारगर है। हर दिन 6 से 8 घंटे की नींद चाहिए। रोजाना की डाइट में ताजी सब्जियां और फल शामिल हों। एक्सरसाइज के साथ-साथ कम-से-कम एक घंटे का ध्यान भी जरूरी है।
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मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए इतने सारे टर्म एंड कंडीशंस। इसी को कहते हैं आदर्श जीवनशैली। मगर ऐसा करना क्या हर किसी के लिए संभव है? खासकर आज की पीढ़ी के लिए, जिसका पूरा समय भागदौड़ में ही बीत जाता है। अगर समय मिलता भी है, तो वह अपना वक्त सोशल मीडिया पर जाया करती है।

आपकी जिंदगी में चाहे जितनी भी व्यस्तता हो, सेहत तो हर किसी के लिए जरूरी है। स्वस्‍थ जीवनशैली की शुरुआत पहले ध्यान से करें। ध्यान को कहीं भी, किसी भी समय किया जा सकता है। ध्यान के दौरान आपको कुछ मिनट किसी एक वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत होगी। भले ही पांच मिनट का ध्यान करें, मगर इसे नियमित करें।
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ध्यान करने की यह माइक्रो तकनीक आपको लंबे समय तक बैठने की आदत बना देती है। यह तनाव या परेशानी के दौरान आपको मानसिक रूप से आराम देती है। ध्यान में जाने के लिए आगे की स्लाइड्स में दी तीन तरकीब अपनाएं-

विचार पर फोकस

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योग स्टूडियो की संस्थापक सीमा सोंधी कहती हैं, 'अपने विचारों पर नजर रखें, लेकिन खुद को उन विचारों से उठने वाली भावनाओं से न जोड़ें। यह जानने की कोशिश करें कि आप क्यों और क्या सोच रहे हैं। अपने आपको अच्छी तरह से जानने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

ज्यादातर लोग इस प्रकार की अपनी आंतरिक प्रक्रिया से अनजान रहते हैं। अपने विचारों पर ध्यान देने से आप अपने डर और असुरक्षा के साथ जुड़ पाते हैं। किसी समस्या का आधा समाधान तो उस समस्या के बारे में पता लगाने या कम-से-कम इसको देखने और दिमाग से बाहर निकाल देने से भी हो जाता है। और यहां ध्यान का अभ्यास करना मददगार होता है।

याद रखें, हमारे ज्यादातर विचार भविष्य या पिछली बातों को लेकर होने वाली चिंताओं से संबंधित होते हैं। आपका वर्तमान आपके दिमाग में बहुत ही कम रहता है।'

सांस पर ध्यान

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सोंधी आगे कहती हैं, ‘आपकी सांसें आपके दिमाग और शरीर को जोड़ने की कड़ी का काम करती हैं। ध्यान के माध्यम से अपनी सांसों पर ध्यान देना सबसे अच्छा उपाय है। विचारों पर ध्यान देने के बाद सांसों पर ध्यान देना दूसरा चरण है। जैसे ही आपका दिमाग विचारों से खाली होता है, आप अपनी सांसों को इसमें ला सकते हैं।

जब आप तनाव या किसी चीज को लेकर उत्तेजित होते हैं, तब यह तकनीक काफी मददगार होता है। इस तरह अपनी सांस पर नजर रखने और दोबारा उसे उसी स्थिति में लाने से आप अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं।
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भावनाओं पर रखें नजर

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यह एक क्लासिक विपासना तकनीक है। विपासना मेडिटेशन को आप कुछ दिनों में सीख सकते हैं। इससे आप अपनी उत्तेजना, डर और चिंता संबंधी भावनाओं को खत्म कर सकेंगे। जब आप चिंतित हों, तब अपने विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय उन भावनाओं को समझें, जो आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

इससे आप अपने ध्यान को दिमाग से शरीर पर केंद्रित कर पाती हैं। यह मन में दबी हुई भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करता है और किसी भी प्रकार के क्रोध, नाराजगी या चिंता से निपटने में मददगार होता है। अच्छा हो कि दिन में खुद को स्वस्थ रखने के लिए कुछ समय का ध्यान करें। 15 मिनट ही सही कहीं टहलें। जूस पिएं आैर संतुलित आहार लें।
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