सामान्य जीवन में आपको उपरोक्त दोनों केस के कई उदाहरण मिल जाएंगे। पहले पहल ऐसे संवेदनाशून्य लोगों को अकेला शख्स कहकर दयनीय होकर हम बेचारा कहते हैं। दोनों स्थितियां आपके साथ भी जुड़ सकती हैं। ऐसे में स्वयं की जुबां को संभालिए और दूसरों को रोशनी की राह दिखाइए।
बात करते हैं मेहुल और प्रिया की मानसिक स्थिति की। मेहुल बेचारी नहीं है। उसके हालात ने उसे एकाकी बना दिया है। वहीं प्रिया का सबसे अलगाव हो गया। ऐसे में वह लोगों के बीच नहीं रहना चाहती। हंसती है, बोलती है, रूठती है, मदद भी करती है, लेकिन अपने सीमित लोगों के साथ ही। दोनों की परिस्थितियों में बारीक असमानता है। यह है भौतिक और आत्मिक स्थिति। आम भाषा में कहें, तो प्रिया अकेलेपन और प्रिया अलगाव का जीवन व्यतीत कर रही है। यानी अकेलेपन और एकाकीपन।
जीवन काला स्याह हो या स्लेटी। इसका चुनाव अकेलेपन और एकाकीपन से जूझ रहा व्यक्ति ही करता है। लोनलीनेस यानी अकेलेपन से जूझ रहे लोग बुझी जिंदगी का चुनाव स्वयं नहीं करते। जिंदगी में लगातार मिलती हताशा, उन्हें सिर्फ अपने में ही मशगूल कर देती है। या यूं कहें कि दूसरों के लिए वह भावना शून्य हो जाता है और अपने लिए भावनाएं काम की गहराइयों और दिन-रात तक ही सिमट जाती है।
एक मायने में अकेलेपन से जूझ रहे व्यक्ति में हंसने, बोलने, भूख, प्यास... सब काफूर हो जाते हैं। जिंदगी काली स्याही हो जाती है। कभी-कभार बेमानी जिंदगी से कोफ्त होती है, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल न होता देख, वे अपने में ही डूब जाते हैं। वहीं दूसरी ओर एकाकीपन से ग्रसित व्यक्ति सीमित लोगों के बीच ही रहना पसंद करता है। या यूं कहें कि ऐसे जीवन का चुनाव वह स्वयं करता है। सबसे हंसना, बोलना उसे नागवार लगता है। कारण जीवन के प्रतिकूल हालात या घमंड।
चाहे व्यक्ति अकेला हो या एकाकी। दोनों का जीवन ही काला स्याह है। परिस्थितियां भिन्न, लेकिन पसंद अकेला रहना ही। कितना अजीब है। हम टेक्नोलॉजी का दम भरते हैं। लोगों से जुड़े रहते हैं आभासी दुनिया से, परंतु अकेलापन ज्यों-का-त्यों रहता है।
माना कि तकनीक लोगों को एक-दूसरे से जोड़ रही है, पर तकनीकी वार्तालाप असल खुशी देने में शून्य है। यह संपर्क का माध्यम बढ़िया है, लेकिन दिलों की गइराइयों में डूबने का माध्यम नहीं। मैं और आप मोबाइल में नजरें झुकाए, अपने-पराए रिश्तों को जोड़े रखते हैं, लेकिन हकीकत के रिश्तों में नजरे फिराए रखते हैं। अपने आसपास ऐसे व्यक्तियों को खोजना, उन्हें खुशी, रंग, हौसला, संबल देना हमारा फर्ज है।