पहले जानिए आपका गुस्सा कितना खतरनाक हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गुस्सा आना एक सामान्य मानवीय भावना है, लेकिन जब यह बार-बार, बहुत अधिक या लंबे समय तक बना रहे तो ये सिर्फ रिश्तों को ही नहीं बल्कि शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
- अध्ययनों से पता चलता है कि गुस्से के दौरान शरीर में फाइट ऑर फ्लाइट प्रतिक्रिया सक्रिय हो जाती है।
- इस समय एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं जिससे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और सांस लेने की गति बढ़ जाती है।
- यदि यह स्थिति बार-बार होती है तो शरीर के कई अंगों पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बना रहने वाला गुस्सा हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, प्रतिरक्षा प्रणाली की दिक्कत, नींद में खराबी और पाचन संबंधी दिक्कतों का जोखिम बढ़ा सकता है।
ज्यादा गुस्सा आने का शरीर पर क्या असर होता है?
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तनाव-गुस्से वाला माहौल बढ़ाने लगता है आपकी उम्र
एक हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसके साथ हर बातचीत तनाव में बदल जाती है, जिसकी नाराजगी का डर हमेशा आपके मन में बना रहता है या जिसकी वजह से घर और दफ्तर का माहौल हमेशा भारी महसूस होता है, तो यह केवल भावनात्मक परेशानी नहीं है। ऐसे रिश्ते आपके शरीर के भीतर ऐसे बदलाव शुरू कर सकते हैं, जो समय से पहले बुढ़ापे की ओर धकेलने लगते हैं।
- शोधकर्ताओं ने पाया कि लगातार तनाव देने वाले रिश्ते शरीर में ऐसे जैविक बदलाव पैदा करते हैं, जिनका असर हमारी उम्र बढ़ने की रफ्तार पर भी दिखाई देता है।
- यानी जिस इंसान के साथ आप रोज रहते हैं, उसका व्यवहार आपके शरीर की कोशिकाओं तक को प्रभावित कर सकता है।
जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चेताया है कि अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो रिश्तों में लगातार तनाव का कारण बन रहा है तो उससे दूरी बना लेना ही आपकी सेहत के लिए बेहतर होगा।
- किसी एक गुस्सैल इंसान का साथ आपको 1.5 फीसदी की दर से तेजी से बुढ़ापे की ओर धकेल रहा होता है।
- मानसिक शांति में खलल डालने वाले रिश्ते केवल मन को ही नहीं दुखाते, बल्कि लगातार तनाव के जरिए हमारी उम्र को भी तेजी से घटा रहे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
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पोषण, समाजशास्त्र और स्वास्थ्य विज्ञान के विशेषज्ञों की तरफ से किया गया यह शोध इस पर केंद्रित था कि सामाजिक ताने-बाने का इंसानी शरीर और सेहत पर क्या असर पड़ता है? वैज्ञानिकों ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए लोगों के सामाजिक दायरे का बारीकी से अध्ययन किया। उनके करीबी रिश्तों और उनमें मिलने वाले तनाव या समर्थन के बारे में जानकारी ली। एजेंसी
अध्ययन में क्या पता चला?
- अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों के थूक के नमूनों से डीएनए मेथिलेशन का विश्लेषण किया गया जिससे इंसान की जैविक उम्र का पता चलता है। ड्यूनेडिनपेस और ग्रिमएज-2 जैसी अत्याधुनिक एपिजेनेटिक क्लॉक का उपयोग करके जांचा गया कि किसी व्यक्ति की शारीरिक या जैविक उम्र उसकी वास्तविक उम्र से कितनी आगे निकल चुकी है।
इसके आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि सिर्फ अपने गुस्से को कंट्रोल करना काफी नहीं है, अच्छी सेहत के लिए आपको ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेनी चाहिए जो बहुत गुस्सैल हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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