इयरफोन से कानों को नुकसान
- फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में बढ़ता जा रहा है खतरा
डब्ल्यूएचओ ने एक वैश्विक रिपोर्ट में सावधान करते हुए कहा, 12 से 35 वर्ष की आयु वाले एक बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कम होना या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इसके लिए मुख्यरूप से लंबे समय तक ईयरबड्स से तेज आवाज में संगीत सुनने और शोरगुल वाली जगहों पर रहना एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
ईयरबड्स या हेडफोन्स का इस्तेमाल करने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोग लगातार 85 (डेसिबल) से ज्यादा तेज आवाज में इसे प्रयोग में लाते हैं। इतनी तीव्रता वाली आवाज को कानों के आंतरिक हिस्से के लिए काफी हानिकारक पाया गया है, जो कम उम्र के लोगों को भी बहरा बनाती जा रही है।
बढ़ती जा रही है कम सुनाई देने की समस्या
- फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?
बीएमजे पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित ये अध्ययन डब्ल्यूएचओ के सहयोग से किया गया है। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययनों के विश्लेषण में टीम ने पाया कि वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली आवाज तय सीमा से कहीं अधिक होती है।
सामान्य लोगों के लिए 25-30 डेसीबल ध्वनि को पर्याप्त माना जाता है, जबकि 80-90 डेसीबल ध्वनि श्रवण शक्ति को स्थायी हानि पहुंचाने वाली हो सकती है। विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वीडियो गेमिंग के समय अधिकतर लोगों का ध्वनि स्तर 85 और 90 डेसीबल के आसपास रहा, जो कानों की सहनशक्ति से कहीं अधिक है।
कानों में आवाज आने की समस्या- टिनिटस
- फोटो : Freepik.com
वीडियो गेम और हेड फोन्स की तेज आवाज है खतरनाक
विशेषज्ञों ने कहा, वीडियो गेमिंग और हेड फोन्स की तेज आवाज सुनने की क्षमता में कमी के साथ टिनिटस का भी खतरा बढ़ाती जा रही है। टिनिटस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को सिर या कानों के अंदर लगातार किसी किसी प्रकार की ध्वनि सुनाई देती है। यह ध्वनि बजने गूंजने, भनभनाने, फुफकारने या दहाड़ने जैसी हो सकती है।
अध्ययनों से पता चलता है कि टिनिटस न केवल मानसिक तनाव और चिंता बढ़ाता है, बल्कि यह कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोगों को एकाग्रता, नींद की परेशानी होती है जो उनकी उत्पादकता पर भी गंभीर असर डालती है।
(ये भी पढ़ें- बुढ़ापे की इस बीमारी का अब तक नहीं है कोई इलाज, कम उम्र से ही शुरू कर दीजिए बचाव के उपाय)
ईयरबड्स का ज्यादा इस्तेमालकहीं बढ़ा न दे समस्या
- फोटो : AmarUjala
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमेरिका स्थित कोलोराडो विश्वविद्यालय में ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ डैनियल फिंक कहते हैं, व्यापक स्तर पर, चिकित्सा और ऑडियोलॉजी समुदाय को इस गंभीर खतरे को लेकर ध्यान देने की आवश्यकता है। युवा आबादी में ईयरबड्स जैसे उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल 40 की उम्र तक सुनने की क्षमता को कम कमजोर करने वाली स्थिति हो सकती है।
सुनने की क्षमता में कमी को सिर्फ कानों का समस्याओं तक ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लोगों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों जैसे डिमेंशिया का जोखिम दो गुना अधिक हो सकता है। जिन लोगों को बिल्कुल नहीं सुनाई देता था या जो लोग बहरेपन के शिकार थे उनमें डिमेंशिया के खतरे को पांच गुना अधिक पाया गया।
---------
स्रोत और संदर्भ
Risk of sound-induced hearing loss from exposure to video gaming or esports: a systematic scoping review
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।