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Breast Cancer: शरीर और बैंक बैलेंस दोनों का दुश्मन बना ब्रेस्ट कैंसर, रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

Mon, 30 Mar 2026 08:15 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक शोध से पता चलता है कि ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही लगभग एक-तिहाई महिलाओं को इलाज खत्म होने के काफी समय बाद भी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं के लिए, ये खर्च जीवन भर उनका पीछा नहीं छोड़ते। भारत में भी ब्रेस्ट कैंसर का आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
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ब्रेस्ट कैंसर और इसका आर्थिक बोझ - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर में सबसे ज्यादा रिपोर्ट किया जाने वाला कैंसर है और ये महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में इसके 23 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए और 6.70 लाख लोगों की मौत हुई। 185 में से 157 देशों में यह महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। अनुमान है कि 2050 तक इसके मामले बढ़कर 30 लाख से तक जा सकते हैं। 

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स्तन कैंसर तब होता है, जब स्तन में असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लग जाती हैं। अगर शुरुआती स्टेज में पहचान न हो पाए तो ये आसपास के अंगों तक फैल सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जीवनशैली की गड़बड़ी जैसे बढ़ता मोटापा, शारीरिक रूप से मेहनत में कमी, रेड मीट का अधिक सेवन, शराब-सिगरेट इसका बड़ा कारण हैं। 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ये बीमारी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालती है, बल्कि मरीज-परिजनों की मानसिक और आर्थिक स्थिति को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज महंगा है, भारत जैसे देशों में इसका आर्थिक असर और भी देखा जा रहा है। इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट काफी डराने वाली है।

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महिलाओं पर भारी पड़ रही है ब्रेस्ट कैंसर की मार - फोटो : Adobe stock photos
ब्रेस्ट कैंसर: शरीर और जेब दोनों पर बढ़ा रहा दबाव

ब्रेस्ट कैंसर के आर्थिक बोझ वाली ये रिपोर्ट यूनाइटेड किंगडम (यूके) की है। वैसे तो यहां नेशनल हेल्थ सर्विसेज (एनएचएस) के अंतर्गत ब्रेस्ट कैंसर का इलाज यूके के सभी निवासियों के लिए पूरी तरह मुफ्त है। इसमें बीमारी की पहचान से लेकर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी तक शामिल है।

बावजूद इसके एक चौंकाने वाली रिपोर्ट से पता चला है कि ब्रेस्ट कैंसर से ठीक हो चुकी महिलाओं को हर साल £12,000 (करीब 15 लाख रुपये) तक के हिडेन खर्चों का सामना करना पड़ता है। 

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च से पता चलता है कि इस बीमारी से जूझ रही लगभग एक-तिहाई महिलाओं को इलाज खत्म होने के काफी समय बाद भी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं के लिए, ये खर्चे उनकी पूरी जिंदगी उनका पीछा करते हैं।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बार्सिलोना में 15वीं यूरोपियन ब्रेस्ट कैंसर कॉन्फ्रेंस में इन नतीजों को पेश करते हुए, क्लिनिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और कमीशन की चेयरपर्सन, प्रोफेसर शार्लोट कोल्स ने कहा, असल बात यह है कि एनएचएस सिर्फ इलाज के समय ही 'मुफ्त' होता है। हमने पाया है कि ऐसे बहुत से बड़े आर्थिक खर्चे हैं जिनकी भरपाई नहीं हो पाती।
 
  • मरीजों को अक्सर बीमारी का पता चलने के बाद और भी ज्यादा खर्चों का सामना करना पड़ता है, जबकि इस दौरान वे काम करने में भी कम सक्षम होते हैं।
  • हम एक और बात पर भी जोर देना चाहते हैं कि कुछ ऐसे भी खर्च हैं जिन्हें पैसों के रूप में मापा नहीं जा सकता। वे इन महिलाओं और उनके परिवारों पर बहुत ज्यादा मानसिक दबाव डाल रहे हैं।

कैंसर रिसर्च यूके कन्वर्जेंस साइंस सेंटर के इंप्लीमेंटेशन साइंटिस्ट डॉ. पैट्रिक किर्केगार्ड कहते हैं, महिलाओं को कभी भी अपने इलाज और बच्चों की देखभाल में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। लेकिन, अफसोस की बात है कि जब इलाज में लगने वाले छिपे हुए खर्चों को व्यावहारिक उपायों से नहीं जोड़ा जाता, तो असलियत यही होती है।

ब्रेस्ट कैंसर बढ़ाता आर्थिक बोझ - फोटो : Adobe stock photos
भारतीय आबादी पर भी बढ़ रहा है दबाव
 
ब्रेस्ट कैंसर और इसकी आर्थिक चुनौतियां भारतीयों को और भी परेशान कर रही हैं। 

204 देशों पर हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि साल 1990 से 2023 के बीच भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामले दोगुने से भी ज्यादा हो गए। 

'द लैंसेट ऑन्कोलॉजी' में छपी 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी ब्रेस्ट कैंसर कोलैबोरेटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर होने की दर 1990 में प्रति 1 लाख महिलाओं पर 13 थी, जो 2023 में बढ़कर 29.4 हो गई है।  भारत में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों में 74% की बढ़ोतरी भी हुई है।

भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में, 2021 में ब्रेस्ट कैंसर का कुल आर्थिक बोझ $8.13 बिलियन था, जिसके साल 2030 तक बढ़कर $14 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यानी हर साल सिर्फ ब्रेस्ट कैंसर के कारण भारतीय आबादी पर कई लाख करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका जताई गई है। 
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कैंसर का बढ़ता जोखिम और चुनौतियां - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एक रिपोर्ट में टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. सुदीप गुप्ता ने बताया कि जैसे-जैसे विकास का स्तर बढ़ता है, अक्सर उसके साथ-साथ कुछ खास तरह के कैंसर के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जाती है, भारत में ब्रेस्ट कैंसर इसका उदाहरण है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दुनिया इस समय कैंसर का व्यापक जोखिम झेल रही है जिसके और बढ़ने की आशंका है। इस खतरे को कम करने किए कई अध्ययनों में रोजाना 30 मिनट वॉक करने जैसी आसान आदतों को अपनाने और सिगरेट-शराब जैसी खतरनाक आदतों से जितनी जल्दी हो सके दूरी बनाने की सलाह दी जाती रही है। 



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स्रोत:
1. Global, regional, and national burden of breast cancer among females, 1990–2023, with forecasts to 2050: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2023

2. Our top picks for the 15th European Breast Cancer Conference (EBCC-15)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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