चूहों से फैलने वाले हंतावायरस से होगा बचाव
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हंतावायरस के लिए वैज्ञानिक तैयार कर रहे हैं वैक्सीन
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि अगर आपके घर में भी चूहे हैं, भले ही वो पालतू हो तो भी आपको हंतावायरस संक्रमण का जोखिम हो सकता है। चूंकि संक्रमण का जोखिम किसी को भी हो सकता है इसलिए हंतावायरस वैक्सीन को बहुत जरूरी माना जा रहा है।
- वैक्सीन तैयार करने का काम तब शुरू हुआ जब लग्जरी क्रूज शिप पर चूहों से फैलने वाले इस वायरस के प्रकोप से तीन लोगों की मौत हो गई।
- हंतावायरस का संक्रमण गंभीर स्थितियों में हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम का रूप ले लेती है। इसके शिकार लगभग 40 प्रतिशत मरीजो की जान जाने का डर रहता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के वैज्ञानिकों ने हंतीन डिजीज के खिलाफ एक नया एंटीजन बनाया है। यह बीमारी हंटावायरस ग्रुप से ही पैदा होती है। इस वैक्सीन का लैब में और जानवरों पर भी टेस्ट किया गया है जिसके फिलहाल अच्छे परिणाम देखे गए हैं।
हंतावायरस से बचाव के लिए वैक्सीन
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एक प्रवक्ता के मुताबिक, वैक्सीन के शुरुआती नतीजे बहुत ही बढ़िया रहे हैं, यानी इसने शरीर में बहुत अच्छी इम्यून प्रतिक्रिया दिखाई है। लेकिन इस वैक्सीन को इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने से पहले अभी और भी बहुत काम करना बाकी है। इसके क्लिनिकल ट्रायल होने बाकी हैं।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रोफेसर एसेल सार्टबाएवा ने कहा, जाहिर है हंतावायरस की वैक्सीन बनना बहुत ही शानदार बात होगी। क्योंकि ऐसा होने पर हम इस बीमारी को फैलने से रोक पाएंगे और संक्रमण के कारण होने वाली मौतों को भी कम करने में मदद मिल सकेगी।
- अभी तक इस वायरस से लड़ने का एकमात्र तरीका यह है कि बीमारी के शुरुआती दौर में लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए उपचार हो जाए।
- अक्सर मरीज इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को फ्लू या कोविड जैसी अन्य सांस की बीमारी मानकर धोखा खा जाते हैं।
- ज्यादातर लोगों को तब तक मेडिकल मदद नहीं मिल पाती है, जब तक कि इन्फेक्शन अपने आखिरी स्टेज में नहीं पहुंच जाता और शरीर को गंभीर नुकसान नहीं हो जाता।
हंतावायरस वैक्सीन बढ़ा रही है उम्मीद
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कई अन्य टीके भी लाइन में
यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फेक्शियस डिजीजज के वायरोलॉजिस्ट जे हूपर कहते हैं, यह हवा से फैलने वाला या बहुत तेजी से संक्रमण वाला नहीं है, इसलिए महामारियों को रोकने की कोशिश करने वाले समूहों के लिए यह उतनी ज्यादा प्राथमिकता में नहीं रहा है।
इस संक्रामक रोग के कुछ और टीके विकास के चरण में हैं। डॉ. हूपर और उनके सहयोगियों ने एंडीज वायरस के लिए एक डीएनए टीका विकसित किया है। जो एक छोटे सैंपल साइज के फेज 1 ट्रायल्स में इसके आशाजनक परिणाम देखे गए हैं। एंडीज वायरस एक प्रकार का स्ट्रेन है जो हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है।
- शोधकर्ताओं ने पाया कि निश्चित खुराक में 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी का उत्पादन किया।
- डॉ. हूपर कहते हैं, कुछ कमियां भी थीं। हमने वैज्ञानिक कार्य कर लिया है। टीकों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ ट्रायल्स और प्रमाणिकता की आवश्यकता है।
हंतावायरस से महामारी का खतरा नहीं
हंतावायरस के हालिया मामलों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी की आशंका फिलहाल नहीं है, क्योंकि यह वायरस आसानी से हवा में नहीं फैलता। फिर भी इसकी मृत्यु दर और गंभीर संक्रमण क्षमता इसे खतरनाक बनाती है।
- संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब संक्रमित चूहों का मूत्र, मल या लार सूखकर हवा में मिल जाता है और व्यक्ति उसे सांस के जरिए अंदर ले लेता है।
- पुराने गोदाम, बंद कमरे, लकड़ी के ढेर या गंदे स्टोर रूम संक्रमण के बड़े स्रोत हो सकते हैं।
- वायरस शरीर में पहुंचकर फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
- गंभीर मामलों में इससे किडनी को भी क्षति होने का जोखिम रहता है।