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Heart Attack: जिम में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले, डॉक्टर ने सुलझाई गत्थी; ये गलती पड़ रही है भारी

Fri, 02 May 2025 05:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फिजिकल फिटनेस और हृदय स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है फिर जिम जाने वाले और फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोगों में हार्ट की समस्याएं क्यों हो रही हैं?
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जिम में हार्ट अटैक के मामले - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़े हैं, विशेषरूप से कोरोना महामारी के बाद से इसमें तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। कम उम्र के लोग भी न सिर्फ इस जानलेवा रोग का शिकार हो रहे हैं, बल्कि इससे मौत के आंकड़े भी बढ़े हैं। आप भी अक्सर हार्ट अटैक और इससे मौत की खबरें सुनते-पढ़ते रहते होंगे, आपके मन भी ये सवाल जरूर आता होगा कि हार्ट अटैक महामारी का रूप क्यों लेता जा रहा है?

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माना जाता रहा है कि फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने, नियमित व्यायाम-जिम करने वाले लोगों में हृदय रोगों का जोखिम कम होता है, पर कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें जिम के दौरान लोगों को हार्ट अटैक हुआ और इससे उनकी मौत हो गई।

अब सवाल ये है कि फिटनेस को लेकर अलर्ट रहने वाले लोगों को हार्ट अटैक क्यों हो रहा है? इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? आइए डॉक्टर से इसके कारणों को समझते हैं।
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(ये भी पढ़िए: पिछले कुछ वर्षों में क्यों बढ़ गए हैं हृदय रोग-हार्ट अटैक के मामले?)

हार्ट अटैक और इससे मौत की घटनाएं - फोटो : Freepik.com

वर्कआउट के दौरान हार्ट अटैक

वर्कआउट के दौरान हार्ट अटैक आना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। ऐसी ही एक दुखद घटना में, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में मध्य प्रदेश के जबलपुर में जिम में एक्सरसाइज करते समय 52 वर्षीय व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने से मौत गई। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज ऑनलाइन सामने आया, जिसमें व्यायाम करते-करते अचानक गिरने से पहले वह फर्श पर डंबल रखते हुए दिखाई दे रहे हैं।
 

इसी तरह से मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध योग गुरु और वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा. पवन सिंहल की हाल ही में साइलेंट हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। डॉ. पवन सिंहल अपनी सादगी और स्वस्थ जीवन शैली के लिए मशहूर थे। डॉ. सिंहल ने वर्ष 2022 में 11 घंटे में 100 किमी की दौड़ का रिकॉर्ड बनाया था। वह नियमित रनिंग और योग करते थे।

हार्ट हेल्थ पर दें ध्यान - फोटो : Adobe stock photos
क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ?

जिम जाने वाले लोगों में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के क्या कारण हैं, इसे कैसे रोका जा सकता है? इस बारे में समझने के लिए हमने दिल्ली स्थित पीएसआरआई हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि प्रकाश से बातचीत की। 

डॉ रवि कहते हैं, फिजिकल फिटनेस और हृदय स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। हालांकि इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि जो लोग शारीरिक रूप से एक्टिव रहते हैं, रनिंग-जिम करते हैं उन्हें हार्ट ब्लॉकेज या हार्ट अटैक नहीं होगा। अच्छी बात ये है कि ऐसे लोग इन समस्याओं को आसानी से झेल सकते हैं।

उदाहरण के लिए जो लोग अक्सर बैठे रहते हैं उन्हें 500 मीटर दौड़ने के लिए कहा जाए तो उसकी हालत खराब हो जाती है, वहीं नियमित रनिंग करने वाले के लिए ये आम बात है।
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हृदय की जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com
जिम में हार्ट अटैक के मामले

अब सवाल उठता है कि फिर नियमित व्यायाम करने वालों में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

डॉ रवि प्रकाश कहते हैं, जिम जाने वालों में दिल के दौरे की घटनाओं के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी तो इसका एक प्रमुख कारण है ही साथ ही बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्हें पहले से अपने हार्ट हेल्थ की सही जानकारी नहीं होती है। ऐसे में कुछ स्थितियां आपके समस्याओं को ट्रिगर कर देती हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।

डॉ रवि प्रकाश बताते हैं, जिम हो या स्विमिंग या कोई भी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स यहां पर एडमिशन लेने से पहले मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा कराया जाता है, यह नियम हर जगह है। हालांकि अक्सर छोटे सेंटर्स या जिम वाले और वहां एडमिशन लेने वाले दोनों ही इसको अनदेखा कर देते हैं। इस छोटी सी गलती के चलते पता ही नहीं चल पाता है कि आपका हार्ट, एक्सरसाइज के दबाव को झेलने के लिए तैयार है या नहीं?

आदर्श रूप से जिम जाने से पहले ईसीजी-इको टेस्ट, सामान्य खून की जांच, ब्लड प्रेशर-कोलेस्ट्रॉल टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए। इससे हृदय की सेहत का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है। अगर इनमें से कोई भी टेस्ट ठीक नहीं है तो जिम में तीव्र स्तर के व्यायाम करने से बचाना चाहिए।


(आप भी तो नहीं हैं हार्ट के मरीज? हार्ट अटैक से बचने के लिए डॉक्टर ने बताया '5S' फॉर्मूला)



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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