फरवरी में ही बढ़ने लगी गर्मी
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फरवरी-मार्च में ही गर्मी तोड़ रही है रिकॉर्ड
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि देश ने 2025 में अब तक की तीसरी सबसे गर्म फरवरी का सामना किया। 26 फरवरी 2025 को मुंबई में तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था जो सामान्य से करीब 5.9 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इसकी वजह से समय से पहले हीटवेव की चेतावनी जारी करनी पड़ी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण हीटवेव-लू का खतरा तो बढ़ ही जाता है, साथ ही इसके गंभीर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। ब्लड प्रेशर, हार्ट के मरीजों के लिए ये मौसम चुनौतियां बढ़ाने वाला हो सकता है। साथ ही कई अध्ययन बताते हैं कि अधिक गर्मी के संपर्क में रहने के कारण तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर भी असर हो सकता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर शिशिर सिंह बताते हैं, अभी तो ओपीडी में गर्मी के कारण होने वाली दिक्कतों के मरीज नहीं आए हैं हालांकि जिस तरह के हालात हैं ऐसे में मार्च खत्म होते-होते तापमान और बढ़ने की आशंका है। आमतौर पर अप्रैल के आखिरी हफ्तों में लू और गर्मी के कारण होने वाली समस्याएं बढ़ जाती हैं पर इस बार हमें पहले से ही सावधान रहने की आवश्यकता है।
वहीं केंद्र सरकार के जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) की रिपोर्ट यह भी बताती है कि अभी तक 74 फीसदी अस्पतालों के पास प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी तैनात हैं, जो भीषण गर्मी से संबंधित मामलों के चिकित्सा प्रबंधन के बारे में बेहतर जानकारी रखते हैं। पर 26 फीसदी अस्पतालों के कर्मचारियों को अब तक यह प्रशिक्षण नहीं मिला है।
मस्तिष्क से संबंधित दुष्प्रभाव
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बढ़ती गर्मी के कई गंभीर दुष्प्रभाव
नौ मार्च को राजधानी दिल्ली में तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अप्रैल-मई में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जून तक तापमान 45 से ऊपर चला जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं उच्च तापमान से न सिर्फ हीट स्ट्रोक और रक्तचाप से संबंधित समस्याओं का खतरा रहता है साथ ही ये मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उच्च गर्मी में शरीर पसीने का उत्पादन करके और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करके स्वयं को ठंडा करने की कोशिश करता है। हालांकि जब आप लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहते हैं तो यह मस्तिष्क के रसायनों जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के काम करने के तरीके को भी बदल सकती है। ये स्थिति हमारे मूड को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि गर्मियों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने, चिंता-तनाव जैसे विकारों के मामले काफी बढ़ जाते हैं।
इसके अलावा जब शरीर लंबे समय तक उच्च तापमान के संपर्क में रहता है, तो इसके कारण आप हीट एग्जॉशन के शिकार हो सकते है। इसके कारण कमजोरी, चक्कर आने, मतली और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये स्थिति हार्ट-फेफड़े और मस्तिष्क की समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
बढ़ते तापमान में कैसे रखें सेहत का ख्याल
डॉक्टर शिशिर कहते हैं, जिस तरह से अभी के हालात हैं उसे देखते हुए सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए। खान-पान में सुधार करें। दिनभर में खूब पानी पीते रहें। तेज धूप में जाने से बचें। गर्मी की स्थिति ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है, इसे भी कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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