प्रोस्टेट कैंसर का बढ़ता जोखिम
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कम लागत और कम समय में प्रोस्टेट कैंसर का चलेगा पता
विशेषज्ञों ने बताया कि इस एमआरआई स्कैन की मदद से लाखों लोगों में समय रहते इस कैंसर का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
- सबसे अच्छी बात ये है कि ये नया एमआरआई स्कैन, मौजूदा एमआरआई स्कैन से आधा समय लेता है और इसकी लागत भी आधी है।
- दूसरी खास बात ये है कि इसे परीक्षणों में रोग का निदान करने में उतना ही सटीक पाया गया है जितने कि अब तक के स्कैन थे।
ब्रिटिश शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी मदद से अब कम समय में अधिक लोगों की जांच की जा सकेगी और स्कैन के लिए मरीजों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम होगा।
आसानी से प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने में मिलेगी मदद
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समय पर रोग का निदान न हो पाना बड़ी चिंता
करीब एक दशक में इस कैंसर के लिए एमआरआई स्कैन की शुरुआत हुई थी जो प्रोस्टेट कैंसर के निदान के तरीके में पिछले 30 वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव रहा है। एमआरआई स्कैन में दिखाई देने वाली असामान्यताओं के आधार पर बायोप्सी ली जा सकती है जिससे कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक एमआरआई स्कैन के स्पष्ट लाभ के बावजूद, इंग्लैंड और वेल्स में प्रोस्टेट एमआरआई की जरूरत वाले केवल 62 प्रतिशत पुरुषों का ही 2019 में एमआरआई जांच हो पाया था।
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंग्लैंड स्थित यूसीएल सर्जरी एंड इंटरवेंशनल साइंस के प्रमुख शोधकर्ता और इस परीक्षण के मुख्य लेखक वीरू कासिविस्वनाथन कहते हैं, वर्तमान में प्रोस्टेट कैंसर के निदान के लिए दुनियाभर में हर साल लगभग 40 लाख एमआरआई स्कैन की आवश्यकता होती है। अगले 20 वर्षों में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में अनुमानित वृद्धि के साथ यह मांग तेजी से बढ़ने वाली है।
समय, लागत और कर्मचारियों की उपलब्धता, ये प्रमुख कारक हैं जिसके चलते लोग स्कैन नहीं करा पाते हैं। ये नई एमआरआई तकनीक ऐसे लोगों के लिए कारगर हो सकती है। अगर हम स्कैन आधे समय में, कम कर्मचारियों और कम लागत पर कर सकें, तो इससे हर उस व्यक्ति को लाभ मिल सकता है जिसमें कैंसर का खतरा है। इसके अलावा समय पर कैंसर का इलाज हो पाने से उसकी जान बचने की संभावना भी अधिक हो सकती है।
कैंसर का समय रहते पता लगाना जरूरी
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प्रोस्टेट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए दिशानिर्देश
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रोस्टेट कैंसर फाउंडेशन ने प्रोस्टेट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए नैदानिक दिशानिर्देश जारी किए थे। नई गाइडलाइंस के तरत सभी पुरुषों को 40 वर्ष की आयु में एक 'बेसलाइन' पीएसए परीक्षण की सलाह दी गई है।
40 वर्ष की उम्र में प्रारंभिक परीक्षण की मदद से पीएसए डबलिंग टाइम का पता लगाने में मदद मिल सकती है, जो ये पता लगाने में मदद करता है कि अगले कितने महीनों में पीएसए का स्तर बढ़ सकता है?
पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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