पैरों की नसों में होने वाली समस्या (सांकेतिक)
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उम्र बढ़ने के साथ कॉमन है ये समस्या
व्हाइट हाउस के चिकित्सक कैप्टन सीन बारबेला द्वारा जारी किए गए एक नोट के अनुसार, ट्रंप की स्थिति सामान्य है, खासकर 70 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में ये दिक्कत अक्सर देखी जाती रही है। क्रॉनिक वेनस इनसफीशिएंसी तब होती है जब पैरों की नसें आपके रक्त को हृदय तक वापस प्रवाहित होने में बाधा उत्पन्न करने लगती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, उम्र बढ़ने के साथ नसों के वाल्व कमजोर होने लग जाते हैं जिससे रक्त के सामान्य रूप से प्रवाहित होने में बाधा उत्पन्न होने लगती है।
फिलहाल व्हाइट हाउस के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की स्थिति गंभीर नहीं है और इसका उपचार किया जा रहा है।
'ज्यादा खतरनाक नहीं होती ये समस्या'
अमेरिका स्थित सोसाइटी फॉर वैस्कुलर सर्जरी ने एक रिपोर्ट में बताया कि, इस स्थिति से प्रभावित अंग में भारीपन, सूजन और दर्द हो सकता है। कुछ मामलों में, क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी के कारण ऐंठन और पैरों में अल्सर जैसी समस्या भी देखी जाती रही है। ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड की वैस्कुलर सोसायटी के अध्यक्ष प्रोफेसर इयान चेटर बताते हैं, यह स्थिति "बहुत ही कम जानलेवा" होती है, ज्यादातर मामलों में दवाओं और अन्य सहायक उपचार के माध्यम से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
पैरों की नसों में होने वाली दिक्कतें
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क्यों होती है ये दिक्कत?
पेन मेडिसिन की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी, डीप वेन थ्रोम्बोसिस या कोई अन्य नसों के अंदर थक्का बनाने वाले समस्या के कारण हो सकती है। समय के साथ, जैसे-जैसे नसें कमजोर होती जाती हैं, उन्हें हृदय तक रक्त पहुंचाने में अधिक परेशानी होने लगती है। नसों में मौजूद छोटे वाल्व काम करना बंद कर सकते हैं। परिणामस्वरूप, निचले अंगों में रक्त जमा होने लगता है जिसके कारणदर्द, पैरों में सूजन और अन्य रक्त संचार संबंधी समस्याएं बढ़ने लग जाती हैं।
कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है। महिलाएं या फिर ज्यादा लंबाई या अधिक वजन वाले इसका अधिक शिकार होते हैं। गर्भावस्था और लंबे समय तक खड़े रहकर काम करने वाले लोगों में इस समस्या के विकसित होने का जोखिम अधिक रहता है।
पैरों की किसी भी समस्या को न करें अनदेखा
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कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैं शिकार?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं चूंकि उम्र बढ़ने के साथ और कुछ अन्य स्थितियां क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती हैं, इसलिए जिन लोगों में इसके जोखिम कारक हैं उन्हें विशेष सावधान रहना चाहिए।
पैरों में हल्का दर्द, ऐंठन या भारीपन महसूस होता हो, खड़े होने पर दर्द बढ़ जाता हो और पैर ऊपर उठाने पर कम हो जाता हो तो ये इस समस्या का सामान्य लक्षण माना जाता है। क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी के शिकार कुछ लोगों को पैरों की त्वचा में भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं। आपको ऐसे घाव हो सकते हैं जो आसानी से ठीक नहीं होते।
इस तरह की स्थितियों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। समय रहते डॉक्टरी सलाह लेने से स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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