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चिकित्सक ने बताया इस इंजेक्शन को रेमडिसिविर से बेहतर, दाम भी है बेहद कम

Thu, 06 May 2021 03:10 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बाजार में डेक्सामिथासोन नामक एक इंजेक्शन उपलब्ध है - फोटो : Social media
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Medically Reviewed by Dr. Sanjeev kumar

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डॉ संजीव कुमार, कार्डियोलॉजिस्ट
सनशाइन हॉस्पिटल, हैदराबाद
डिग्री- एमडी, डीएम कार्डियोलॉजी  
अनुभव- 24 वर्ष 
कोरोना की दूसरी लहर बेहद खतरनाक साबित हो रही है। अबतक कई लोग काल के गाल में समा चुके हैं। अपने व्यक्ति को बचाने के लिए लोग तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। रेमडिसिविर की कालाबाजारी रूकने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में एक अन्य इंजेक्शन हैदराबाद के एक कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा बनाए गए वीडियो के बाद से चर्चे में है। हालांकि लोग अब भी अंजान है कि बाजार में डेक्सामिथासोन नामक एक इंजेक्शन उपलब्ध है जो कि रेमडिसिविर से कई गुने सस्ता तो है ही, साथ ही प्रभावी भी है, साथ ही रेमडिसिविर की तरह इसके कोई भयानक दुष्परिणाम भी नहीं है। आइए जानते हैं कोरोना के इलाज में काम आने वाले डेक्सामिथोसन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में। 

इस कारण डेक्सामिथासोन है सस्ता
बाजार में डेक्सामिथासोन मात्र 10 रुपये में उपलब्ध है। इसके पीछे कारण यह है कि यह जीवन रक्षक आवश्यक ड्रग की सूची में शामिल है अर्थात न तो इसकी कालाबाजारी हो सकती है और न ही इसे अधिक दाम में बेचा जा सकता है। कंपनी द्वारा 5 रुपये में यह बनाया जाता है और 10 रुपये में बिक जाता है। कंपनी या अन्य किसी भी व्यक्ति विशेष को इसे बेचने पर ज्यादा कमाई नहीं होती है।   

इंफ्लेमेशन से बचाते हैं सीरॉइड

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सनशाइन हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ संजीव के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस दो सप्ताह से अधिक नहीं रहता है। पहले सप्ताह में वायरस शरीर में  प्रवेश करता है और बढ़ता है। वहीं दूसरे सप्ताह में शरीर में इंफ्लेमेशन इतना बढ़ जाता है कि शरीर खुद वायरस को नष्ट कर देता है लेकिन इंफ्लेमेशन का इस तरह से बढ़ना हमारे फेफड़ों को खराब करने लगता है। इंफ्लेमेशन को कम करने में सीरॉइड लाभकारी होते हैं। यह मरीज की जान बचा सकते हैं। इनमें डेक्सामिथासोन पर ट्रायल्स हो चुके हैं। 

ट्रायल्स में फेल है रेमडिसिविर 
विश्वभर में रेमडिसिवर पर कई सारे शोध हो चुके हैं। डॉ संजीव बताते हैं कि अमेरिका द्वारा कोरोना के 60,000 मरीजों पर किए गए शोध का कोई अर्थ नहीं निकला क्योंकि रेमडिसिविर अपने ट्रायल्स में फेल हो गया जिसके बाद इंजेतक्शन बनाने वाली कंपनी ने यह बताया कि इंजेक्शन का इस्तेमाल मरीज की जान नहीं बचा सकता लेकिन यदि मरीज को कोरोना के शुरुआती दिनों में ही दे दिया जाए तो वो जल्दी ठीक हो सकता है, उदाहरण के लिए 15 दिन की रिकवरी 10 दिन में हो जाती है। 
नोट- यह लेख सनशाइन हॉस्पिटल के डॉक्टर डॉ संजीव कुमार से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर संजीव कुमार पिछले 23 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्रियां मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मद्रास मेडिकल कॉलेज और दयानंद मेडिकल कॉलेज से ली है। डॉ संजीव दो बार गोल्डमेडलिस्ट रह चुके हैं। 

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अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 

 

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