सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने इन खाद्य पदार्थों के पैक पर सामने की ओर (फ्रंट ऑन पैक) लेबलिंग के लिए जल्द कानून बनाने की मांग भी की है। उपभोक्ताओं को नुकसानदेह खाने से बचाने की दिशा में फ्रंट ऑन पैक लेबलिंग एक प्रभावी तरीका है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) का कहना है कि स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह डिब्बाबंद जंक फूड पर प्रभावी ढंग से सामने की तरफ ‘चेतावनी’ लगाई जानी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को उनकी सरल और प्रभावी जानकारी मिल सके।
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अभी नहीं पता लगता वसा, नमक व चीनी का नुकसानदेह स्तर
संस्थान ने इन खाद्य पदार्थों के पैक पर सामने की ओर (फ्रंट ऑन पैक) लेबलिंग के लिए जल्द कानून बनाने की मांग भी की है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण का कहना है, फूड पैकेट पर दी जाने वाली पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी उपभोक्ताओं को भ्रमित रखती हैं। इससे संबंधित खाद्य पदार्थ के नुकसानों के बारे में पता नहीं चलता। लिहाजा, उपभोक्ताओं को नुकसानदेह खाने से बचाने की दिशा में फ्रंट ऑन पैक लेबलिंग एक प्रभावी तरीका है।
सात वर्षों में नहीं बन पाया कानून
विश्लेषण में बताया गया है, बीते सात वर्षों में चार समितियों और दो मसौदे नियमनों के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को अति-प्रसंस्कृत (अल्ट्रा प्रोसेस्ड) जंक फूड में छिपे वसा, नमक और चीनी के नुकसानदेह स्तर की चेतावनी देने के लिए फ्रंट ऑन पैक लेबलिंग कानून नहीं बन पाया है।
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कड़ा कदम नहीं उठा रहा एफएसएसएआई
सीएसई में खाद्य सुरक्षा व विषाक्त कार्यक्रम के निदेशक अमित खुराना के मुताबिक, 2014 में एफएसएसएआई द्वारा गठित समिति ने सबसे पहले फ्रंट ऑन पैक लेबलिंग का प्रस्ताव दिया था। डिब्बाबंद जंक फूड उद्योग इसे लागू करने में देरी और इसे कमजोर करने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। खुद एफएसएसएआई जनस्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों को बचाने के लिए कड़ा कदम उठाने से हिचकिचाते रहा है।
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