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Covid-19: एशियाई देशों के बाद अब अमेरिका में भी बढ़ने लगा कोरोना, JN.1 के साथ इस वैरिएंट ने भी बढ़ाई चिंता

Mon, 26 May 2025 04:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछले एक महीने के भीतर दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर एशियाई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। भारत में भी एक अंतराल के बाद कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी राज्यों को अलर्ट किया गया है।
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कोरोनावायरस, कोविड 19 अपडेट्स - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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कोरोना का एक बार फिर से बढ़ता संक्रमण चिंता बढ़ाने लगा है। पिछले एक महीने के भीतर दुनिया के कई हिस्सों, विशेषकर एशियाई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। भारत में भी एक अंतराल के बाद कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी राज्यों को अलर्ट किया गया है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि अभी देश में संक्रमण की स्थिति काफी नियंत्रित है, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिस तरह से कोरोना वैरिएंट्स ( NB.1.8.1 और LF.7 जो भारत में बढ़ रहा है) की प्रकृति रही है, और हांगकांग-सिंगापुर में हाल में जैसी स्थिति देखी गई है, उससे सबक लेते हुए सभी लोगों को एहतियातन सावधान रहने की जरूरत है।




कई महीनों की शांति के बाद, कोविड-19 भारत के शहरी क्षेत्रों में धीरे-धीरे वापसी कर रहा है, जिसके चलते दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक सहित कई अन्य राज्यों में इस महीने नए मामले दर्ज किए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में कोरोनावायरस के 23 मामले दर्ज किए गए हैं।
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(केरल से लेकर दिल्ली तक 'कोरोना संकट'; क्या आने वाली है एक और लहर)

भारत में कोरोनावायरस के मामले - फोटो : Adobe stock photos

देश में कोरोना के हालिया अपडेट्स 

1. कोरोनावायरस दिल्ली-एनसीआर में भी बढ़ रहा है जिसे देखते हुए सभी लोगों को सावधान किया गया है।

गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एक 55 वर्षीय महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि की गई है। ये इस बार बढ़ते संक्रमण के बीच नोएडा में पहला मामला है। सीएमओ, नरेंद्र कुमार के अनुसार, महिला को आइसोलेट कर दिया गया है, परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कई गई हालांकि उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला ने कुछ दिन पहले ट्रेन से यात्रा की थी।

2. इससे पहले, एम्स ऋषिकेश ने तीन कोविड मामलों की सूचना दी थी। एम्स ऋषिकेश की निदेशक मीनू सिंह ने बताया कि तीन में से एक मरीज को पहले ही छुट्टी दे दी गई है। एक मरीज स्थानीय है जिसे आइसोलेशन में रखा गया है जबकि एक अन्य मरीज गुजरात से है जो बद्रीनाथ यात्रा के लिए यहां आया था। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि कोविड का यह प्रकार बहुत हानिकारक नहीं है, लेकिन लोगों को सतर्क रहना चाहिए।

3. बेंगलुरु में एक 84 साल के कोविड पॉजिटिव मरीज की मौत हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि मरीज को 13 मई को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 17 मई को उसकी मृत्यु हो गई, वह कोमोरबिडिटी का शिकार थे। उसका कोविड टेस्ट का नतीजा शनिवार को पॉजिटिव आया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 38 कोविड मामले सामने आए हैं, जिनमें से 32 बेंगलुरु में हैं। 


(ये भी पढ़िए- महामारी विशेषज्ञ से जानिए कितना खतरनाक है फैल रहा वैरिएंट)
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कोरोनावायरस और इसके वैरिएंट्स - फोटो : Adobe stock photos
अमेरिका भी बढ़ने लगा संक्रमण

एशियााई देशों के साथ-साथ अब अमेरिका में भी कोरोना के नए मामलों में उछाल देखी गई है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक रिपोर्ट में बताया कि देश में कोरोना के नए मामलों में वृद्धि हुई है, जांच में इसके लिए एनबी.1.8.1 वैरिएंट के प्रमुख पाया गया है, ये ओमिक्रॉन का ही एक सब-वैरिएंट है। यही वैरिएंट भारत में भी देखा जा रहा है, जो पहले चीन-हांगकांग में भी बढ़ते संक्रमण के लिए जिम्मेदार पाया गया था। 

सीडीसी के प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल इस वैरिएंट के मामले इतने अधिक नहीं हैं कि इसे कोविड डेटा ट्रैकर में शामिल किया जाए, हालांकि सभी लोगों को बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अलर्ट जरूर  किया गया है। अभी तक यू.एस. बेसलाइन सर्विलांस डेटा में NB.1.8.1 के 20 से भी कम सीक्वेंस हैं, इसलिए यह कोविड डेटा ट्रैकर डैशबोर्ड में शामिल होने की सीमा को पूरा नहीं कर पाया है। हम  सार्स-सीओवी-2 के सभी सीक्वेंस की निगरानी करते हैं, और अगर यह अनुपात में बढ़ता है, तो आगे विचार किया जाएगा।

NB.1.8.1 वैरिएंट को अब तक ज्यादा खतरनाक नहीं पाया गया है और इससे संक्रमित भी आसानी से ठीक हो जाते हैं। पर इसकी संक्रामकता दर अधिक है जिससे एक बार बढ़ने के बाद इसे नियंत्रित करना कठिन हो सकता है, इसलिए पहले से ही सावधानी जरूरी है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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