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Coronavirus vaccine: कोरोना वैक्सीन पर अच्छी खबर, 10 अगस्त तक आ सकता है टीका, ऐसे लोगों को मिलेगा पहले

Wed, 29 Jul 2020 02:41 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
कोरोना वायरस ने दुनियाभर में तबाही मचा रखी है। करोड़ों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं जबकि छह लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसका वैक्सीन बनाने को लेकर दुनियाभर में कुल 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिसमें से कुछ के ट्रायल अंतिम चरण में हैं। हालांकि इस बीच वैक्सीन को लेकर रूस से अच्छी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि यह देश जल्द ही वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दे सकता है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक 10 अगस्त या उससे पहले ही वैक्सीन की मंजूरी के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। बता दें कि रूस की इस वैक्सीन को मॉस्को के गमलेया इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। आइए जानते हैं इस वैक्सीन को लेकर ताजा जानकारी और साथ ही यह भी जानते हैं कि यह किस तरह के लोगों को सबसे पहले मिलेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी अधिकारियों ने बताया कि वैक्सीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए मंजूरी दी जाएगी, लेकिन सबसे पहले यह फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स यानी सीधे तौर पर कोरोना संक्रमित लोगों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी जाएगी।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
हालांकि रूस ने आधिकारिक तौर पर वैक्सीन के ट्रायल से संबंधित कोई जानकारी साझा नहीं की है। इस वजह से फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि यह वैक्सीन कितनी कारगर होगी। कुछ लोगों का मानना है कि जल्दी से वैक्सीन को बाजार में उपलब्ध कराने को लेकर राजनीतिक दबाव है, ताकि रूस की वैज्ञानिक शक्ति को दुनिया के सामने रखा जा सके। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
रूस की वैक्सीन का अभी दूसरा चरण पूरा करना बाकी है। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि तीन अगस्त तक यह पूरा हो जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण का ट्रायल शुरू किया जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, वैक्सीन इसलिए जल्दी तैयार हो गई, क्योंकि यह अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए पहले से ही निर्मित एक वैक्सीन का संशोधित संस्करण है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस वैक्सीन के मानव परीक्षण में रूसी सैनिकों ने स्वयंसेवक के रूप में काम किया है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन बनाने की इस परियोजना के निदेशक अलेक्जेंडर गिन्सबर्ग ने खुद भी वैक्सीन की खुराक ली है। 
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Moderna Vaccine - फोटो : Instagram
अमेरिकी वैक्सीन की क्या है स्थिति? 
  • इधर अमेरिका भी वैक्सीन के ट्रायल के अंतिम चरण में है। इसे मॉडर्ना कंपनी ने विकसित किया है। अभी दो दिन पहले ही 30 हजार लोगों पर इसका परीक्षण शुरू किया गया है। मॉडर्ना वैक्सीन के पहले चरण के नतीजे सकारात्मक रहे थे और दूसरे चरण के आंकड़े अगस्त के आखिर तक या सितंबर में जारी किए जाने की उम्मीद है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
कब तक आएगी ब्रिटेन की वैक्सीन? 
  • ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन ChAdOx1 भी टीके की रेस में सबसे आगे है। इस वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है। यह वैक्सीन ट्रायल के अंतिम चरण में है। भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड की इस वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है। दावा किया जा रहा है कि अगर सबकुछ सही रहा तो साल के अंत तक यह बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
वैक्सीन की रेस में भारत कहां? 
  • भारत में इस समय दो वैक्सीन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिसमें आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा तैयार वैक्सीन 'कोवैक्सीन' (Covaxin) भी शामिल है। इसका दिल्ली एम्स, पटना एम्स, रोहतक पीजीआई समेत अन्य संस्थानों में मानव परीक्षण शुरू हो चुका है। वहीं जायडस कैडिला ने भी भारतीय औषधि महानियंत्रक से अनुमति मिलने के बाद मानव परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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