प्रतीकात्मक तस्वीर
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चाइनीज कोविड वैक्सीन
चीन की प्राइवेट फार्मा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। सरकारी मंजूरी से पहले किसी वैक्सीन को इंसानों पर परीक्षण में खरा उतरना होता है। मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद ट्रायल के अंतिम चरण में पहुंचने वाला ये दुनिया का तीसरा वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। CoronaVac नाम की इस वैक्सीन का फिलहाल ब्राजील में नौ हजार वॉलिंटियर्स पर ट्रायल चल रहा है।
कोरोना महामारी के लिए जिस रफ्तार से वैक्सीन डेवलेपमेंट का काम चल रहा है, उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल की शुरुआत तक सिनोवैक बॉयोटेक की वैक्सीन सरकारी मंजूरी के लिए तैयार हो सकती है।
साल 2002-2003 के बीच जब सार्स महामारी फैली थी, तो इससे दुनियाभर में 774 लोगों की जानें गई थीं। तब सिनोवैक ने पहले चरण के ट्रायल शुरू कर दिए थे, लेकिन वो महामारी अचानक ही खत्म हो गई। हालांकि तब कंपनी को वैक्सीन प्रोजेक्ट बंद कर देने से बड़ा नुकसान हुआ था, लेकिन ये पूरी तरह से बेकार नहीं गया। 17 साल बाद जब कोरोना महामारी दुनिया के सामने आई, तो सिनोवैक ने अपने पुराने रिसर्च को फिर से शुरू कर दिया, क्योंकि कोविड-19 सार्स महामारी से काफी मिलती-जुलती है।