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Coronavirus vaccine: रेस में सबसे आगे हैं ये 5 टीके, जानें भारत कहां तक पहुंचा

Wed, 29 Jul 2020 09:24 AM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
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Corona Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
क्या आपको मालूम है कि दुनिया में इससे पहले सबसे तेज वैक्सीन किस बीमारी के लिए खोजी गई थी। टाइम मैगजीन के मुताबिक, वो बीमारी मम्प्स थी, जिसकी वैक्सीन तैयार करने में वैज्ञानिकों को चार साल का वक्त लगा था। लेकिन कोरोना महामारी जिस तेजी से फैल रही है और जिस रफ्तार से लोगों की जान ले रही है, उसे देखते हुए इसकी वैक्सीन विकसित करने का काम ऐतिहासिक रूप से तेज गति से चल रहा है। इस समय कोरोना महामारी के खिलाफ दुनियाभर में वैक्सीन विकसित की लगभग 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन इनमें से कुछ ही ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में पहुंच पाई हैं और अभी तक किसी भी वैक्सीन के पूरी तरह से सफल होने का इंतजार ही किया जा रहा है। इनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, मॉडर्ना फार्मास्युटिकल्स, चीनी दवा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक के वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स अहम हैं। आइए हम जानते हैं कि इनमें से कौन सी वैक्सीन फिलहाल किस चरण में है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैक्सीन प्रोजेक्ट ChAdOx1 में स्वीडन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका भी शामिल है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है। मई के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या विश्वनाथन ने ऑक्सफोर्ड के प्रोजेक्ट को सबसे एडवांस कोविड वैक्सीन कहा था। इंग्लैंड में अप्रैल के दौरान इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल का काम एक साथ पूरा किया गया। 

18 से 55 साल के एक हजार से ज्यादा वॉलिंटियर्स पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की सुरक्षा और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का जायजा लिया गया था। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ये वैक्सीन प्रोजेक्ट अब ट्रायल और डेवलपमेंट के तीसरे और अंतिम चरण में है। ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के ट्रायल के इस चरण में करीब 50 हजार वॉलिंटियर्स के शामिल होने की संभावना है। दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील जैसे देश ट्रायल के अंतिम चरण में भाग ले रहे हैं। 

भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है। अगर अंतिम चरण के नतीजे भी सकारात्मक रहे, तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम साल के आखिर तक ब्रिटेन की नियामक संस्था 'मेडिसिंस एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी' (एमएचआरए) के पास रजिस्ट्रेशन के लिए साल के आखिर तक आवेदन करेगी। 
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Moderna Vaccine - फोटो : Instagram
मॉडर्ना कोविड वैक्सीन

माना जा रहा है कि मॉडर्ना वैक्सीन प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण के शुरुआती हिस्से में है। मॉडर्ना ट्रायल के इस चरण में 30 हजार लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण करेगी। बोस्टन की इस कंपनी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर किसी नए प्रोडक्ट का परीक्षण तभी किया जाता है, जब वो नियामक एजेंसियों के पास मंजूरी के लिए दाखिल किए जाने के आखिरी दौर में हो। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कोरोना वायरस के लिए इसे अब तक की सबसे तेज वैक्सीन प्रोजेक्ट करार दिया है। 

मॉडर्ना के क्लीनिकल ट्रायल में अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) भी शामिल है। एनआईएच के निदेशक फ्रांसिस कोलिंस का कहना है कि साल 2020 के आखिर तक कोरोना की वैक्सीन बना लेने का लक्ष्य रखा गया है। मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बांसेल ने बताया, 'मुझे उम्मीद है कि मॉडर्ना की वैक्सीन अमेरिकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मापदंडों पर 75 फीसदी तक खरी उतरेगी। हमें उम्मीद है कि ट्रायल में हमारी वैक्सीन कोरोना को रोकने में कामयाब होगी और हम इससे महामारी को खत्म कर पाएंगे।' 

कोविड-19 की बीमारी के लिए जिम्मेदार वायरस Sars-Cov-2 की जेनेटिक संरचना को हासिल करने में मॉडर्ना को महज 42 दिन लगे थे। मॉडर्ना वैक्सीन के पहले चरण के नतीजे सकारात्मक रहे थे और दूसरे चरण के आंकड़े अगस्त के आखिर तक या सितंबर में जारी किए जाने की उम्मीद है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
चाइनीज कोविड वैक्सीन 

चीन की प्राइवेट फार्मा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। सरकारी मंजूरी से पहले किसी वैक्सीन को इंसानों पर परीक्षण में खरा उतरना होता है। मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद ट्रायल के अंतिम चरण में पहुंचने वाला ये दुनिया का तीसरा वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है। CoronaVac नाम की इस वैक्सीन का फिलहाल ब्राजील में नौ हजार वॉलिंटियर्स पर ट्रायल चल रहा है। 

कोरोना महामारी के लिए जिस रफ्तार से वैक्सीन डेवलेपमेंट का काम चल रहा है, उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल की शुरुआत तक सिनोवैक बॉयोटेक की वैक्सीन सरकारी मंजूरी के लिए तैयार हो सकती है। 

साल 2002-2003 के बीच जब सार्स महामारी फैली थी, तो इससे दुनियाभर में 774 लोगों की जानें गई थीं। तब सिनोवैक ने पहले चरण के ट्रायल शुरू कर दिए थे, लेकिन वो महामारी अचानक ही खत्म हो गई। हालांकि तब कंपनी को वैक्सीन प्रोजेक्ट बंद कर देने से बड़ा नुकसान हुआ था, लेकिन ये पूरी तरह से बेकार नहीं गया। 17 साल बाद जब कोरोना महामारी दुनिया के सामने आई, तो सिनोवैक ने अपने पुराने रिसर्च को फिर से शुरू कर दिया, क्योंकि कोविड-19 सार्स महामारी से काफी मिलती-जुलती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन 

इस समय भारत में केवल दो वैक्सीन प्रोजेक्ट्स को इंसानों पर परीक्षण की मंजूरी दी गई है। फार्मा कंपनी भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन उनमें से एक है। दूसरा वैक्सीन प्रोजेक्ट जाइडस कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड का है। कोवैक्सीन के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में सरकारी एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी शामिल हैं। इसके ह्यूमन ट्रायल के लिए देश भर में 12 संस्थाओं को चुना गया है, जिनमें रोहतक की पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हैदराबाद की निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज शामिल हैं। 

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने पिछले दिनों इन 12 संस्थाओं के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर्स से कोवैक्सीन ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की रफ्तार में तेजी लाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि ये शीर्ष प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है, जिस पर सरकार के शीर्ष स्तर से निगरानी रखी जा रही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
फाइजर और बॉयोएनटेक की वैक्सीन 

अमेरिकी फार्मा कंपनी 'फाइजर' और जर्मन कंपनी 'बॉयोएनटेक' मिलकर एक कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट BNT162b2 पर काम कर रही हैं। सोमवार को दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान जारी कर बताया कि वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आखिरी चरण में पहुंच गई है। अगर ये परीक्षण सफल रहे, तो अक्तूबर के आखिर तक वे सरकारी मंजूरी के लिए आवेदन दे सकेंगे। कंपनी की योजना साल 2020 के आखिर तक वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आखिर तक 1.3 अरब खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करने की है।  

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का दावा करने वाली इस वैक्सीन के दो खुराक दिए जाएंगे। दुनियाभर में 120 जगहों पर इसके ट्रायल चल रहे हैं और इसमें 30 हजार वॉलिंटियर्स के शामिल होने की संभावना है। अमेरिका की सरकार ने फाइजर के साथ दस करोड़ खुराक खरीदने का समझौता पहले से कर रखा है। समझौते के तहत जरूरत पड़ने पर 50 करोड़ खुराक की आपूर्ति और की जाएगी। 
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