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Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन के लिए भारत बायोटेक ने वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ किया समझौता, देश में भी होगा ट्रायल

Wed, 23 Sep 2020 02:42 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : Pixabay
दुनियाभर में कोरोना वायरस से अब तक तीन करोड़ 18 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि इससे नौ लाख 75 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि इसके लिए दुनियाभर में वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है। यहां भी कोरोना की तीन-तीन वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं और अब भारत बायोटेक कंपनी  ने वैक्सीन के लिए सेंट लुइस में वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ एक लाइसेंसिंग समझौता किया है। दरअसल, स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने नाक के माध्यम से दी जाने वाली कोरोना की वैक्सीन विकसित की है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत बायोटेक ने स्कूल ऑफ मेडिसिन की वैक्सीन से संबंधित एक विज्ञप्ति जारी की है, जिसके मुताबिक कंपनी के पास अमेरिका, जापान और यूरोप को छोड़कर अन्य सभी बाजारों में टीके के वितरण का अधिकार होगा। इसे कोरोना की एकल खुराक वैक्सीन कहा जा रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कंपनी ने बताया कि इस वैक्सीन के पहले चरण का परीक्षण सेंट लुइस विश्वविद्यालय की इकाई में होगा, जबकि नियामक मंजूरियां हासिल करने के बाद भारत बायोटेक अन्य चरणों का परीक्षण भारत में भी करेगी। चूहों पर इस वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस वैक्सीन को बनाने वाले शोधकर्ताओं का दावा है कि नाक से दी जाने वाली यह वैक्सीन इंजेक्शन के माध्यम से लगाए जाने वाले टीके की तुलना में अधिक व्यापक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया यानी कोरोना से बचने के लिए इम्यूनिटी पैदा करती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने वायरस के स्पाइक प्रोटीन को सम्मिलित किया है, जिसका उपयोग कोरोना वायरस एक अन्य वायरस के अंदर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए करता है। इसे एडिनोवायरस कहा जाता है, जो सामान्य सर्दी-जुकाम का कारण बनता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने एडिनोवायरस के प्रभाव को खत्म कर दिया, जिससे यह बीमारी पैदा करने में असमर्थ हो गया। 
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