प्रतीकात्मक तस्वीर
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मेडिकैगो के शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए चिकन अंडे के बजाय पौधों का इस्तेमाल किया है। दरअसल, आमतौर पर चिकन अंडे का इस्तेमाल जैविक प्रोटीन के रूप में किया जाता है ताकि वैक्सीन प्रोटीन विकसित किया जा सके। इसमें अंडे को इंजेक्ट किया जाता है और फिर परीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और यह महंगा भी होता है, लेकिन पौधा आधारित वैक्सीन काफी सस्ते में हो जाता है और यह प्रभावी भी होता है।