फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus vaccine: नए तरीके से कोरोना की वैक्सीन बना रहा यह देश, जानिए बाजार में कब तक आएगी?

Fri, 17 Jul 2020 04:36 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
दुनिया के कई देश कोरोना महामारी से लड़ने और उससे निजात पाने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। इनमें भारत से लेकर अमेरिका, रूस, चीन और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इस कड़ी में अब कनाडा भी जुड़ गया है। उसने भी वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल (चिकित्सीय परीक्षण) शुरू कर दिया है। हालांकि उसका वैक्सीन बनाने का तरीका थोड़ा अलग है। वह पौधा आधारित वैक्सीन बना रहा है और इसे बनाने की जिम्मेदारी बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी मेडिकैगो की है। आइए जानते हैं यह वैक्सीन कब तक बन जाएगी और बाजार में उपलब्ध होगी?
विज्ञापन

2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मेडिकैगो के उपाध्यक्ष ने हाल ही में यह जानकारी देते हुए बताया कि 'कोरोना वैक्सीन बनाने का काम पहले चरण में पहुंच गया है। हम अक्तूबर में सुरक्षा और इम्युनोजेनेसिटी परिणामों को जानने के लिए उत्सुक हैं।' उन्होंने कहा कि अब पहले चरण में 180 स्वस्थ स्वयंसेवकों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी और उनपर उसका असर देखा जाएगा। इसमें 18 से 55 साल की महिलाएं और पुरुषों को शामिल किया जाएगा। 
विज्ञापन

3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कंपनी ने आगे बताया कि अक्तूबर में इस वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण किया जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो 2021 के अंत तक हम वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक बनाने का प्रयास करेंगे। आपको बता दें कि कंपनी ने मार्च महीने में ही वैक्सीन विकसित कर लेने का दावा किया था। उसका कहना था कि कंपनी ने यह वैक्सीन महज 20 दिनों के अंदर बना ली थी। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मेडिकैगो के शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने इस वैक्सीन को विकसित करने के लिए चिकन अंडे के बजाय पौधों का इस्तेमाल किया है। दरअसल, आमतौर पर चिकन अंडे का इस्तेमाल जैविक प्रोटीन के रूप में किया जाता है ताकि वैक्सीन प्रोटीन विकसित किया जा सके। इसमें अंडे को इंजेक्ट किया जाता है और फिर परीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और यह महंगा भी होता है, लेकिन पौधा आधारित वैक्सीन काफी सस्ते में हो जाता है और यह प्रभावी भी होता है।  
विज्ञापन

5 of 6
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेडिकैगो, लगभग दो दशकों से पौधा आधारित टीकों का निर्माण और विकास कर रहा है। वर्तमान में कंपनी टीकों को विकसित करने के लिए तंबाकू जैसे पौधों का इस्तेमाल कर रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
हालांकि मेडिकैगो की वैक्सीन को बनने में भले ही समय लगे, लेकिन कई देश तो वैक्सीन बनाने के सभी परीक्षणों में सफल होने का दावा भी कर रहे हैं। जैसे कि, रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी का दावा है कि Gam-COVID-Vac Lyo नाम की उसकी वैक्सीन सभी चरणों के परीक्षण में सफल रही है और सितंबर तक वैक्सीन बाजार में आ जाएगी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें