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Coronavirus: क्या मच्छरों से भी फैल सकता है कोरोना वायरस? सामने आई ये सच्चाई

Sun, 19 Jul 2020 11:46 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस के कारण मची तबाही थमने का नाम नहीं ले रही है। इसकी वजह से लाखों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करोड़ों लोग इससे संक्रमित हैं। अब यह वायरस इंसानों से इंसानों में फैलता है, यह तो साबित हो चुका है, लेकिन अब भी सबसे बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि क्या कोरोना वायरस जानवरों या फिर जीव-जंतुओं से भी इंसानों में फैल सकता है? इस सवाल को लेकर कई महीनों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि मच्छरों से संबंधित हाल ही में हुई एक शोध साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिकों ने शोध का मुद्दा रखा था, 'क्या मच्छर कोरोना वायरस के वाहक हो सकते हैं?' अब इसका जवाब उन्हें मिल गया है। आइए जानते हैं कि इस शोध में क्या कुछ सामने आया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोध के मुताबिक, मच्छरों से कोरोना वायरस का संक्रमण इंसानों में नहीं फैलता है। अध्ययन में पाया गया कि वायरस मच्छरों की तीन मुख्य प्रजातियों में अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाता। ऐसे में अगर कोई मच्छर किसी कोरोना संक्रमित इंसान को काट भी ले तो वो अन्य इंसानों में उसका संक्रमण नहीं फैला सकता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस अध्ययन की पुष्टि की है। उसने शोध का हवाला देते हुए कहा कि मच्छर कोरोना के संक्रमण का वाहक नहीं बन सकता है। हालांकि इसके बावजूद यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या कुत्ते और बिल्ली जैसे जानवर कोरोना के वाहक हैं, क्योंकि फिलहाल इसके पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन ऐसे मामले कई बार सुनने को मिल जरूर हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेन के एक फार्म में कई ऊदबिलाव कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं, जिसके बाद वायरस के संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए एक लाख ऊदबिलाव (मिंक) को मारने का आदेश दिया गया है। दरअसल, फार्म में काम करने वाले कर्मचारी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे, जिसके बाद ऊदबिलावों का कोरोना टेस्ट किया गया था, जिसमें फार्म के करीब 87 फीसदी ऊदबिलावों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
अब यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैले या फिर इंसानों से इंसानों में, आखिरकार भुगतना तो इंसान को ही है। हालांकि वैज्ञानिक इसका वैक्सीन बनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक वैक्सीन बाजार में आ जाएगी। रूस ने तो सितंबर में ही वैक्सीन के आ जाने का दावा किया है। यहां की सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने यह वैक्सीन बनाई है, जिसका नाम Gam-COVID-Vac Lyo है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
इधर भारत ने भी वैक्सीन बनाने के मामले में तेजी दिखानी शुरू कर दी है। यहां भारत बायोटेक और आईसीएमआर की मदद से बनाई गई देसी कोरोना वैक्सीन 'कोवैक्सिन' का मानव परीक्षण भी शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वैक्सीन सभी परीक्षणों में सफल होने के बाद जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। 
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