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Coronavirus: कोरोना की वैक्सीन कारगर हो पाएगी या नहीं? AIIMS के रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

Fri, 04 Sep 2020 02:13 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Amarujala
दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब दो करोड़ 61 लाख के पार पहुंच गए हैं जबकि इस वायरस ने आठ लाख 64 हजार से अधिक लोगों की जान ले ली है। कोरोना की कारगर और प्रभावी वैक्सीन बनाने का काम तो वैसे दुनियाभर में चल रहा है, लेकिन इस वायरस के बदलते स्वरूप ने वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मध्य प्रदेश में भोपाल स्थित एम्स में कोरोना को लेकर शोध चल रहा है, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। शोध के मुताबिक, यह वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है यानी अपना रूप बदल रहा है, जिसकी वजह से वैक्सीन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। एम्स भोपाल के निदेशक प्रोफेसर सरमन सिंह के नेतृत्व में हुए शोध में ये बातें पता चली हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए दुनियाभर में बनाई जा रही वैक्सीन शायद ही उसपर काम कर पाए और इसका सबसे बड़ा कारण शायद ये है कि यह वायरस अपना रूप तेजी से बदल रहा है। इस वजह से वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक भी परेशान हैं।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना ने अब तक कितनी बार बदला अपना स्वरूप? 

भोपाल एम्स समेत कई देशों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, जो कोरोना वायरस चीन से फैला था, उसका स्वरूप डी 614जी था। उसके बाद से यह अब तक 83 बार म्यूटेट हो चुका है यानी अपना रूप बदल चुका है। प्रोफेसर सरमन सिंह का कहना है कि स्टडी के आधार पर यह कहना अभी मुश्किल है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन पर मौजूदा वैक्सीन कितनी प्रभावी होगी। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
अमेरिका में 60 बार हुआ कोरोना वायरस का म्यूटेशन 

शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, कोरोना वायरस सबसे ज्यादा अमेरिका में अपना रूप बदल चुका है। यहां करीब 60 बार इस वायरस का म्यूटेशन हुआ है। इसके अलावा मलयेशिया में भी आठ बार कोरोना वायरस का म्यूटेशन देखा गया है जबकि भारत में यह पांच बार अपना रूप बदल चुका है। ऐसे में जब भी वैज्ञानिकों को ये लगता है कि अब उन्होंने एक कारगर वैक्सीन बना ली है, तब तक यह वायरस अपना रूप बदल चुका होता है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना का बदलता स्वरूप इंसान के शरीर में एंटीबॉडी भी नहीं बनने दे रहा है। उनका कहना है कि इसके म्यूटेशन की रफ्तार इसे खत्म करने के लिए किए जा रहे उपायों से भी तीन गुना तेज है, जिससे काफी मुश्किलें पैदा हो रही हैं। इसके अलावा शोध में यह भी सामने आया है कि म्यूटेशन के कारण प्लाज्मा थैरेपी भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। ऐसे में यह कहना अभी मुश्किल है कि जो वैक्सीन आएगी, वह इसके बदले हुए स्वरूप पर असरदार होगी या नहीं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि टैम्बिया और सिंगापुर के विज्ञान, टेक्नॉलोजी और शोध संस्थान के सेबैस्टियन मॉरर-स्ट्रोह का कहना है कि म्यूटेशन के कारण कोरोना वायरस में इतना बदलाव नहीं होगा कि उसकी जो वैक्सीन बनाई जा रही है उसका असर कम हो जाएगा। उनका कहना है कि वायरस में बदलाव करीब-करीब एक जैसे हैं और जो वैक्सीन विकसित की जा रही है, उसको इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 
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